हर साल बारिश बन जाती थी आफत्, इस साल तीज कुंवर को मिल गई है बड़ी राहत

कोरबा. एक साल पहले बारिश के ही मौसम में गृहिणी तीज कुंवर को घर का चूल्हा जलाने के लिए न जाने क्या-क्या मशक्कत करनी पड़ती थी। घर के दूसरे काम छोड़कर जंगल जाना पड़ता था। बारिश का मौसम होता था इसलिए सूखी लकड़ियां कहीं नहीं मिलती थी। गीली लकड़ियों को न चाहकर भी घर लाती और उसे कई दिनांे तक सूखाती रहती। चूंकि घर में तो भोजन रोजाना पकाना है। ऐसे में गीली लकड़ियों को जैसे-तैसे चूल्हे में डालकर आग सुलगाना पड़ता था। इस दौरान पूरी तरह से आग लगने से पहले लकड़ी से निकले धुएं से न सिर्फ तीज कुंवर घर के अन्य सभी सदस्य भी परेशान होते थे। एक किसान परिवार के लिए जहां बारिश बड़ी राहत होती है, ऐसे में बारिश का मौसम तीजकुंवर सहित परिवार के लिए हर दिन सुबह-शाम मुसीबतें खड़ी कर देता था। अनेक परेशानी उठाने के बाद ही उसके घर का चूल्हा जल पाता था और तब जाकर भोजन बन पाता था। तीज कुंवर को एक साल पहले हर साल बारिश में ऐसे विपरीत हालातों से जूझना पड़ता था। अब जबकि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से उसे मात्र दो सौ रूपए में गैस सिलेण्डर एवं चूल्हा मिल गया है तो बारिश की वो पुरानी आफत बीते दिनों की बात हो गई है। गैस से न सिर्फ तीजकुंवर को परिवार के सभी सदस्यों को बड़ी राहत मिली है।
पाली विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत हरनमुड़ी निवासी तीज कुंवर पति राज कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना से उसे भी गैस कनेक्शन मिला है। उसने बताया कि घर में पहले चूल्हा में ही खाना पकता था। चूल्हा जलाने के लिए जंगल से लकड़ी इकट्ठा करती थी। उसने बताया कि जंगल से लकड़ी लाना बहुत ही कठिन कार्य है। बारिश के दिनों में सूखी लकड़िया तलाशना और भी कठिन काम है। उसने बताया कि गीली लकड़ी को सूखा कर चूल्हा जलाना पड़ता था, लकड़ियां पूरी तरह से सूख नहीं पाती थी फिर भी जलाना पड़ता था, जिससे भारी मात्रा में धुआं निकलता था। तीज कुंवर ने बताया कि चूल्हा जलाने में बहुत समय निकल जाता था। अब जबकि गैस कनेक्शन मिला है तो उसे खाना पकाने में बहुत सहूलियत होती है। उसने बताया कि गैस के माध्यम से चूल्हा जलाना बहुत आसान है, इससे न तो धुअंा निकलता है और न ही बर्तन काले होते हैं। जब मर्जी गैस से चूल्हा जला लो। अब सूखी लकड़ियां खरीदने की भी जरूरत नहीं पड़ती। उसने बताया कि बारिश में जंगल से लकड़ी लाना बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। कभी आकाशीय बिजली का खतरा तो कभी जहरीले सर्प का और जंगली जानवरों का खतरा रहता है। गैस सिलेण्डर से खाना पकाने पर वह न सिर्फ खतरों से बच सकती है, धुएं से फैलने वाली बीमारी के इलाज में होने वाले खर्च से बच कर रूपए की बचत भी कर सकती है।

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