अ’यो’ध्या फैसले पर पूर्व जस्टिस एके गांगुली के बयान ने मचाया हं’गा’मा, कहा- अ’ल्पसंख्य’कों के साथ..

अयोध्या मामले मैं सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आने के बाद देशभर में खुशी का माहौल बना रहा। हर धा’र्मि’क पक्ष की तरफ से अमन और शांति बनाए रखने की अपील की गई थी और ऐसा ही हुआ। देश के लोगों ने सां’प्रदा’यिक सौहार्द बना कर रखा और अ’यो’ध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तहे दिल से स्वागत किया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का वि’रोध किया है।

आपको बता दें कि कोलकाता में मीडिया से बातचीत करते हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली ने कहा है कि अ’यो’ध्या मामले में देश के मु’सल’मानों के साथ गलत हुआ है। रिटायर्ड जज एके गांगुली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इस फैसले से व्यथित हैं। एके गांगुली ने कहा कि अ’यो’ध्या में आखिर म’स्जि’द गि’राई गई थी।

कोई भी कहेगा कि मुस’लमा’नों की म’स्जि’द गिराई गई थी। सरकार इस म’स्जि’द को बचाना चाहती थी। इस मामले में कोर्ट में अभी भी केस चल रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा सं’वि’धान जब अ’स्ति’त्व में आया तो नमाज यहां पढ़ी जा रही थी. एक वैसी जगह जहां न’मा’ज़ पढ़ी, जहां पर म’स्जि’द थी, अब इस जगह को सुप्रीम कोर्ट मं’दि’र के लिए देने को कह रहा है।

ये सवाल मेरे दिमाग में उठ रहा है। उन्होंने कहा कि सं’वि’धान का एक छात्र होने के नाते फैसले को समझने में मुझे थोड़ी दिक्कत हो रही है। जस्टिस गांगुली ने आगे कहा कि जो सबूत मिले हैं और जो फैसला आया है, उससे मैं अपने को संतुष्ट नहीं कर पा रहा हूं। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि उनकी समझ में कुछ खामियां हो, लेकिन उनके विचार से इस जजमेंट में कई सवालों के जवाब अनुत्तरित रह गए हैं।

जस्टिस गांगुली ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का ये सं’वैधा’निक कर्तव्य है कि वो सभी के अ’धिका’रों की र’क्षा करे, इसमें अ’ल्पसं’ख्यक भी शामिल हैं। गौरतलब है कि यह फैसला रा’म मं’दिर के पक्ष में सुनाया गया है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक अब वि’वादि’त स्थल पर रा’म मंदि’र का निर्माण किया जाएगा और म’स्जि’द नि’र्माण के लिए अ’यो’ध्या में ही 5 एकड़ जमीन अलग से दी गई है।

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