इन आंकड़ों से खुली मायावती के दावे की पोल?, बसपा-सपा गठबंधन का..

लोकसभा चुनाव के बाद बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी से अपना गठबंधन तोड़ लिया है. बसपा अध्यक्ष मायावती ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के वोट उसके पक्ष में ट्रान्सफर नहीं हुए. मायावती के इस बयान के बाद कई विश्लेषक इस बारे में पता लगाने लगे कि मायावती के दावों में कितनी सच्चाई है. परन्तु जब लोगों ने पड़ताल की तो बात कुछ और ही निकल कर आयी है.

बहुजन समाज पार्टी के दावे की एक तरह से पोल खुल गई है. मालूम ये हुए है कि सपा का वोट तो बसपा में ट्रान्सफर हो गया है लेकिन बसपा का वोट सपा में ट्रान्सफर नहीं हुआ है. इसको लेकर जो सबसे आसानी से समझने वाली बात है वो है ये कि 2014 में बसपा 80 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे 19.77% वोट हासिल हुए थे वहीँ इस बार वो 38 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरी थी लेकिन उसे 19.36% वोट मिले.


इसका अर्थ है कि बसपा को सपा के वोट अच्छी तरह ट्रान्सफर हुए लेकिन बसपा को अपने वोट भी पूरे नहीं मिले साथ ही वो सपा को भी किसी तरह का फ़ायदा न करा सकी. सपा पिछली बार 78 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसे 22% वोट मिले थे, इस बार वो 37 सीटों पर चुनाव लड़ी और उसे 18% वोट मिले. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में सपा महज़ 5 सीटें जीत सकी जबकि बसपा को 10 सीटों पर जीत हासिल हुई वहीँ भाजपा को 62 सीटों पर जीत हासिल हुई.

मायावती ने गठबंधन तोड़ने के बाद कहा था कि अखिलेश यादव और डिंपल यादव से उनके रिश्ते बने रहेंगे. हालाँकि उन्होंने जल्द ही होने वाले विधानसभा उपचुनाव पर कहा कि कुछ समय के लिए गठबंधन पर ब्रेक है लेकिन ये परमानेंट नहीं है. सपा बसपा गठबंधन पर मायावती ने कहा कि यह कोई हमेशा के लिए ब्रेक नहीं है। वहीँ कुछ इसी तरह का बयान सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दिया. अखिलेश ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा उपचुनाव में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

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