प्रधानमंत्री का चौथा चीन दौरा: 11वीं बार जिनपिंग से मिलेंगे, पहली बार चीनी राष्ट्रपति मोदी के लिए तोड़ेंगे प्रोटोकॉल

बीजिंग. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को दो दिन के दौरे पर चीन पहुंच चुके हैं। मोदी का ये चार साल में चौथा चीन दौरा है। इसके साथ वह सबसे ज्यादा बार चीन जाने वाले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह तीन बार चीन गए थे। शुक्रवार को मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वुहान शहर में बातचीत होगी। इसे ‘अनौपचारिक शिखर वार्ता’ नाम दिया गया है। पहली बार ऐसा हो रहा है, जब भारत और चीन के किसी नेता की बैठक के बाद कोई ज्वाइंट कॉन्फ्रेंस या मीडिया ब्रीफिंग नहीं होगी। इसके बावजूद दोनों के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

मोदी के लिए प्रोटोकॉल तोड़ेंगे जिनपिंग
– चीन में भारत के रक्षा सलाहकार रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन कहते हैं कि मोदी ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं, जिनके लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अनौपचारिक शिखर बैठक तय की है। प्रोटोकॉल पर बेहद ध्यान देने वाली चीनी राजनीति में यह बहुत बड़ा अपवाद है।
– “चीन का राष्ट्रपति किसी दूसरे देश के प्रधानमंत्री के साथ शिखर बैठक करे, यह वाकई बड़ी कूटनीतिक घटना है। यह मोदी-जिनपिंग के बीच के निजी रेपो से संभव हो पाया है।”
– “अभी तक मोदी जब भी चीन की यात्रा पर आए, उनकी आधिकारिक मुलाकात प्रधानमंत्री ली केकियांग से होती रही थी। इसके बाद वह राष्ट्रपति जिनपिंग से मिलते थे। इसीलिए वुहान में अनौपचारिक शिखर बैठक तय की गई है। दरअसल, बीजिंग में बैठक होने से प्रोटोकॉल आड़े आ जाता।”
– सेंटर फॉर ज्वाइंट वारफेयर स्टडीज के निदेशक लेफ्टीनेंट जनरल विनोद भाटिया ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बाद चीन ने मोदी के लिए यह प्रोटोकॉल तोड़ा है। जब प्रधानमंत्री के बजाए खुद राष्ट्रपति उनके साथ शिखर बैठक करेंगे। अमेरिका में प्रधानमंत्री का पद है ही नहीं। यह दुनिया के सबसे पावरफुल नेताओं में से दो की मुलाकात है।

जून में मोदी फिर चीन जाएंगे
– मोदी इस साल जून में एक बार फिर शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन की बैठक में शामिल होने चीन जाएंगे। मोदी की ये दूसरी स्टेट विजिट है।
– इसके अलावा वह वहां जी-20 और ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने जा चुके हैं। जबकि 4 साल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सिर्फ एक बार भारत आए हैं।
– मोदी पीएम बनने के बाद 47 महीने में 55वीं बार विदेश दौरे पर हैं।
– मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले 67 साल में सिर्फ पांच प्रधानमंत्रियों ने चीन का दौरा किया था। इनमें जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी, नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह शामिल हैं।

क्यों बार-बार चीन जा रहे मोदी?कद बढ़ाने, विवाद सुलझाने और रुतबे की चाह

शंघाई सहयोग संगठन
जून में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) की बैठक होनी है। भारत काफी समय से इस संगठन में अपना कद बढ़ाना चाहता है, इसलिए मोदी और जिनपिंग के बीच होने वाली मुलाकात के गहरे मतलब निकाले जा रहे हैं। इसमें पीएम मोदी, शी जिनपिंग से भारत की संगठन में भागीदारी बढ़ाने की वकालत कर सकते हैं।

डोकलाम विवाद
मोदी-जिनपिंग की इस अनौपचारिक शिखर वार्ता को डोकलाम विवाद के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई कड़वाहट दूर करने की कोशिश भी समझी जा रही है। इसमें 2 साल से संबंधों में आई तल्खी को दूर करने और रिश्तों को और मजबूत करने की पहल संभव है। आर्थिक गतिविधि बढ़ाने पर भी बात हो सकती है।

एनएसजी सदस्यता
बैठक के लिए एजेंडा घोषित नहीं है। पर इसमें डोकलाम के अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति, चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, एनएसजी सदस्यता, व्यापार और भारत में चीनी निवेश पर बातचीत हो सकती है। चीन 2013 में बॉर्डर डिफेंस को-ऑपरेशन एग्रीमेंट पर अलग फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रख सकता है।

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