मिडिल क्लास लोगों के लिए रवीश कुमार ने लिखा फेसबुक पोस्ट, आपको भी पढ़ना चाहिए

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मोदी सरकार ने मिडिल क्लास और सरकारी कर्मचारी वर्ग का ख़्याल रखने के साथ ग़रीबों का बखूबी ध्यान रखा है। हम इस बात से अवगत हैं कि ग़रीबों का एक बड़ा वर्ग कई तरह की दिक्कतों से गुज़र रहा है। उसे अनाज नहीं मिल रहा है। लेकिन यह भी नहीं भुलाया जाना चाहिए कि मोदी सरकार ने 33 करोड़ ग़रीब लोगों के खाते में 31,235 करोड़ रुपये दिए हैं। प्रधानमंत्री ग़रीब कल्याण योजना के तहत।

इनमें से 20.05 करोड़ महिलाओं के जनधन खाते में 10,025 करोड़ रुपये दिए गए हैं। हर खाताधारक को तीन महीने 500 रुपये मिलेंगे। महिलाएं खुश भी हैं कि मोदी जी ने कुछ दिया है। कुछ नाराज़ होंगी लेकिन ये तो चलता ही है। 2 करोड़ 82 लाख लोगों के खाते में 1405 करोड़ की राशि पेंशन के रूप में दी गई है। वृद्धावस्था पेंशन, विकलांग्ता पेंशन और विधवा पेंशन के रूप में।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के तहत 8 करोड़ किसानों के खाते में पहली किश्त चली गई है। हर खाते में 2000 रुपये। 16,146 करोड़ पैसा जा चुका है। 10.6 लाख कर्मचारियों को भविष्य निधि फंड से 162 करोड़ रुपया दिया गया है। 2.17 करोड़ बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन मज़दूरों को 3497 करोड़ की आर्थिक मदद दी गई है। दे दी गई है। 39.27 करोड़ लाभार्थी को मुफ्त में अनाज दिया गया है। 1 लाख मीट्रिक टन से अधिक दाल दी गई है। अलग अलग राज्यों को जा चुकी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 2.66 करोड़ मुफ्त उज्ज्वला सिलेंडर दिया जा चुका है।

33 करोड़ से अधिक ग़रीब लोगों को पैसे और अनाज मिले हैं। सरकार ने यह मदद न की होती तो स्थिति भयावह हो सकती थी। सरकार को और अधिक पैसे गरीबों को देने चाहिए। कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा है कि 7500 रुपये हर किसी के खाते में जाए। मुझे लगता है कि अभी चुनाव नहीं है तो कांग्रेस की बात सरकार मान भी लेगी और मान भी लेना चाहिए। ग़रीब को सबसे पहले बिना किसी राजनीतिक नुकसान या फायदे के मदद मिलनी चाहिए। कांग्रेस का सुझाव अच्छा है कि हर गरीब के खाते में 7500 रुपये दिए जाएं।

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मध्यम वर्ग और सरकारी कर्मचारी वर्ग जानता है और समझता भी है कि सरकार की वित्तीय स्थिति पर कोविड-19 और उसके पहले चली आ रही ख़राब अर्थव्यवस्था का बुरा असर पड़ा है। इसलिए दोनों ही वर्ग इस विषम परिस्थिति में एक स्वर से निर्विरोध सरकार के साथ खड़ा हैं। सिर्फ खड़ा नहीं है बल्कि चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कोविड-19 के मोर्चे पर ड्यूटी भी कर रहे हैं।

कोविड-19 के दौर में प्राइवेट सेक्टर में अपनी नौकरी और सैलरी गंवाने वाले मिडिल क्लास के राष्ट्रीय चरित्र से भी हतप्रभ हूं। उसने अपने हितों की बिल्कुल परवाह नहीं की है और अपना मन जमात और गोदी मीडिया के भड़काऊ पत्रकारिता में रमा लिया है। दुनिया के विकसित देशों में मिडिल क्लास को नौकरी जाने पर सरकार की तरफ से बेरोज़गारी भत्ता मिल रहा है लेकिन भारत का मिडिल क्लास बेरोज़गार हो कर हिन्दू मुस्लिम डिबेट से सुख की प्राप्ति में लीन है।

भारत के बेरोज़गार ऐसे ही खुश हैं। उन्हें व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी के ज़रिए नफ़रती और प्रोपेगैंडा वाले मीम की सप्लाई होती रहे, उन्हें कुछ नहीं चाहिए। जिन लोगों को नौकरी चाहिए लेकिन उनके लिए बुरी ख़बर है। सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे करोड़ों नौजवानों को अब भर्ती की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए। ऐसा करना भी इस सकंट के वक्त देश हित में साथ देना है। ऐसे नौजवान कभी पीछे नहीं हटेंगे। उनके पिछले साल की मेहनत बेकार जा सकती है। न तो नतीजे आएंगे और न ही भर्तियां होंगी। पता नही बेरोज़गारों और नौजवानों का क्या होगा। चिन्ता तो होती है।

अमरीका में पांच हफ्ते में दो करोड़ 65 लाख लोग बेरोज़गार हुए हैं। इन्होंने बेरोज़गारी भत्ते के लिए आवेदन किया है। हर बेरोज़गार के परिवार के एक सदस्य को 1200 डॉलर मिलेगा। पिछले हफ्ते 44 लाख लोगों ने आवेदन किया। भारत के मिडिल क्लास और बेरोज़गार हुए लोगों को इन सबसे कोई मतलब नहीं है। बस जमात और थूकने को लेकर ग़लत ही सही मगर कुछ न कुछ ख़बर और व्हाट्स एप मीम की आपूर्ति बनी रहे। कितने बेरोज़गार हुए और उन्हें भत्ता चाहिए या नहीं ये सब सवाल भारत में नहीं है। भारत विश्व गुरु है।

सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों से उनकी मर्ज़ी के बग़ैर एक दिन का वेतन कोविड-19 के लिए बने नए प्रधानमंत्री कोष में योगदान ले लिया गया। कर्मचारियों ने इसका बहुमत से स्वागत किया। कुछ लोग होंगे जो एतराज़ कर रहे थे। अब सरकार ने कर्मचारियों के हित के लिए एक और अच्छा फैसला लिया है। जुलाई 2021 तक के लिए महंगाई भत्ते में वृद्धि रोक दी है। इससे सरकार को हज़ारों करोड़ की आर्थिक बचत होगी। यही नहीं जिन्हें पेंशन मिल रही है उन्हें भी महंगाई भत्ता की वृद्धि नहीं मिलेगी।

हम सभी को खर्चे सीमित करने होंगे और जितना मिल रहा है उतने में जीना होगा। पहले भी यह वर्ग लाल बहादुर शास्त्री जी के समय कर दिखाया है इस बार भी मोदी जी के समय कर दिखाएगा। मैं इस बारे में स्पष्ट हूं। बल्कि विरोधियों को जवाब देने के लिए प्रात पांच बजे थाली भी बजाकर दिखा देगा। सब मिलकर लड़ेंगे। सब मिलकर सबकी ग़लतियों का बचाव कर लेंगे। यह वक्त पोज़िटिव होने का है। कोविड-19 पोज़िटिव होने का नहीं है। मैंने सुना है कि हरिशंकर परसाई जी शानदार लिखते थे।

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