शिवपाल के फ़ैसले से सपा में ख़ुशी की लहर, प्रसपा नहीं ….

उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी है. लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पार्टी में विशेष मंथन का दौर है. अब जो ख़बर आ रही है उसके बाद सपा के नेताओं में ख़ुशी की लहर है. असल में लम्बे समय से समाजवादी पार्टी का एक गुट इस कोशिश में लगा है कि प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल यादव फिर से सपा में शामिल हो जाएँ. शिवपाल यादव ने इसको लेकर जो संकेत दिए थे वो सपा के लिए अच्छे नहीं थे.

अब जो ख़बर मिल रही है उसके बाद सपा में ख़ुशी हो सकती है. असल में कुछ ही दिनों में यूपी की 12 विधानसभा सीटों पर वर्ष उपचुनाव होने हैं। अंदर की ख़बर ये है कि शिवपाल सिंह यादव की पार्टी में ऐसे विचार का मंथन हो रहा है कि प्रसपा इस उपचुनाव में प्रत्याशी नहीं उतारेगी. ख़बर ये भी है कि प्रसपा सपा उम्मीदवारों का समर्थन कर सकती है.


सूत्रों का कहना है कि पार्टी मुखिया शिवपाल यादव 2022 विधानसभा से पहले प्रसपा संगठन को मजबूत करेंगे जिसके लिए वे वरिष्ठ पदाधिकारियों व नेताओं संग कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं।उपचुनाव न लड़ने पर हाल ही में 10 जून से 13 जून तक प्रसपा की संपन्न हुई बैठक में चर्चा हुई थी.वहीं 2022 विधानसभा चुनाव में सपा व भाजपा को कैसे पटखनी देनी है इसका भी प्लान तैयार किया जा रहा है। संगठन को मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया और एक्सपर्ट की भी मदद ली जाएगी।

प्रसपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया है कि प्रसपा को लोकसभा चुनाव से बहुत कुछ सीखने को मिला है और अब पार्टी का पूरा ध्यान 2022 विधानसभा चुनाव पर है। इसके लिए पार्टी तैयारियों में जुट गई है। जनता के बीच पैठ बनाने का हमारे पास सुनहरा मौका है।हम लोग एक्सपर्ट से भी मदद लेंगे वहीं शहरी व ग्रामीण इलाकों में प्रसपा खुद को कैसे पेश करेगी, इस पर काम किया जा रहा है।


ख़बर है कि प्रसपा अब घर-घर जाकर कार्यकर्ता बनाने को लेकर अभियान चलाएगी. कोशिश ये होगी कि इसमें युवक, युवतियां प्रमुखता से शामिल हो. प्रसपा ने बड़ा सोशल नेटवर्क तैयार करने का भी लक्ष्य रखा है जिससे कि २०२२ के विधानसभा चुनाव में पार्टी मजबूती से चुनाव में उतरे.

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