सुरह कौसर सुबह में 6 बार इस तरह पढ़ने का फायेदा, अगर आप जान लेंगे तो…

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों बहनों आज हम आपको बताएंगे सूरह कौसर की फजीलत के बारे में। आज हम आपको बताएंगे कि यह सुरह नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम पर कब नाजिल हुई। इस की फजीलत क्या है और इसको पढ़ने से अल्लाह पाक इस दुनिया में क्या बरकत अता करते हैं और आखिरत में इसका क्या अज्रो सवाब देंगे. आज हम आपको बताएंगे सूरह कौसर के बारे मे जिस का तर्जुमा है कि ऐ पैगंबर यकीन जानो यह हमने तुम्हें कौसर अता कर दी, लिहाजा तुम अपने परवरदिगार की खुशनुदी के लिए नमाज पढ़ो और कुर्बानी करो यकीन जानो कि तुम्हारे दुश्मन का नाम लेने वाला भी कोई नहीं होगा अब.

मेरे दोस्तों जिस वक्त प्यारे नबी के बेटे हजरत कासिम का बचपन में इं’त’काल हुआ तो कुफ्फार ए मक्का खास कर के आस बिन वाईल आपको ‘अबतर” कहकर ताना देने लगा। दोस्तों अबतर का मतलब होता है जिस की नस्ल आगे ना चले या जिसकी औलाद ना हो उस वक्त नबी के इत्मीनान लिए अल्लाह ने यह सूरह उतारी.

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और कहा कि आपको एक ऐसी नेमत के साथ नवाजा है जो किसी नबी या रसूल को नहीं अता किया गया यानी हौज़ ए कौसर ।आपके दीन पर चलने वाले और आप पर एतबार लाने वाले बेशुमार लोग होंगे और अबतर तो तुम्हारा दुश्मन है जिसका कोई नाम लेने वाला भी नहीं होगा और वैसा ही हुआ आप रसूल अल्लाह की ज़िंदगी का एक एक लम्हा किताबों में महफूज है और आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम की एक एक सुन्नत आज भी जिंदा है.

आप सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम का नाम लेने वाले और आप की सुन्नतों पर मर मिटने वाले बेशुमार लोग हैं और इंशा अल्लाह रहेंगे और आपके दुश्मन का तो कोई नाम भी नहीं जानता है और अगर कोई उसका जिक्र भी करता है तो बुराई के साथ ही करता है। कौसर का नफ़सी मायने बहुत ज्यादा भलाई से है और कौसर जन्नत की हौज का नाम भी है जो नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के तसर्रुफ़ में दी जायेगी और आपकी उम्मत के लोग उससे सैराब होंगे.

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एक सहाबी फरमाते हैं कि जब नबी करीम सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम मस्जिद में हमारे दरमियान थे उस वक्त आप हल्की सी नींद में या बेहोशी में थे फिर हंसते हुए आपने सर उठाया तो हमने उनसे पूछा कि या रसूल अल्लाह आपके हंसने की क्या वजह है फिर आप सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया कि मुझ पर इसी वक्त एक सूरत नाजिल हुई है फिर आपने बिस्मिल्लाह पढ़कर सूरह कौसर पढ़ा फिर फरमाया कि क्या तुम जानते हो कि कौसर क्या चीज है तब हम ने जवाब दिया कि अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते होंगे तब आप रसूल अल्लाह ने फरमाया की यह जन्नत की एक हौज है जिसका अल्लाह ने मुझसे वादा किया है.

यह वह हॉज है जिस पर मेरी उम्मत कयामत के रोज पानी पीने आएगी पानी पीने के बर्तन सितारों की गिनती की तरह बहुत ज्यादा होंगे उस वक़्त कुछ लोगों को फरिश्ते वहां से हटा देंगे तब मैं कहूंगा या अल्लाह यह तो मेरी उम्मत है तब अल्लाह कहेगा की आपको नहीं पता कि आप के बाद इन्होंने दिन में क्या नई चीज जोड़ी.

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