उँगलियों को चटखाने से पहले नबी करीम(स.अ.व.) का ये फरमान ज़रूर जान ले,हर मुस्लिम को…

अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उँगलियों को चटखाने से मना फरमाया है,खास तौर पर नमाज़ के दौरान उँगलियों को चटखाने से रोका गया है।इस बारे में उलमा फरमाते हैं कि घर से नमाज़ के लिए मस्जिद जाते हुए रास्ता में या मस्जिद में नमाज़ के इंतिज़ार में बैठे हुए या नमाज़ की हालत में एक हाथ की उंगलियां दूसरे हाथ की उंगलीयों में डालना मकरूहे तहरीमी (हराम के करीब)है.

अल्लाह के रसूल सललल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इससे मना फ़रमाया है क्यों कि ये अमल आम तौर पर सुस्ती का बाइस होता है जो नमाज़ी की शायान-ए-शान नहीं और आदमी जब नमाज़ के लिए मस्जिद जा रहा हो या मस्जिद में नमाज़ के इंतिज़ार में हो तो वो हुकमा नमाज़ में शुमार होता है।वहीं उलमा फरमाते हैं कि नमाज़ के बाहर उँगलियाँ चटखाना भी मकरूह है लेकिन मकरूहे तंजीही है।

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इसलिए नमाज़ के बाहर भी उँगलियों को चटखाने से बचना चाहिए,हाँ अगर बहुत सुस्ती आ रही हो,तो कभी कभी ऐसा करने से कोई परेशानी नहीं है। वहीं इस बारे में यूनीवर्सिटी आफ़ कैलीफोर्निया के माहिर रेडीयालोजी राबर्ट बीवटन का कहना है कि काफ़ी सालों से ये बेहस जारी है कि उंगलीयों से कड़ाके निकलने की वजह जोड़ों में कोई बुलबुला बन जाना है.

जबकि कुछ लोगों का ख़्याल है कि बुलबुले का फूट जाना है लिहाज़ा इस बात का खोज लगाने के लिए तहक़ीक़ की गई है।इस तहक़ीक़ में 40सेहत मंद लोगों का इंतिख़ाब किया गया जिनमें 17ख़वातीन और23मर्द शामिल थे।इन 40लोगों में30को उंगलीयों के कड़ाके निकालने की आदत थी जबकि 10लोग इस आदत में मुबतला ना थे।

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इन लोगों की उंगलीयों के जोड़ों का जायज़ा अल्ट्रासाऊंड मशीन के इमेज के ज़रीये लिया गया।तहक़ीक़ में शामिल कुछ का कहना था कि वो बाक़ायदगी के साथ बीते कई सालों से उंगलीयों के कड़ाके निकाल रहे हैं और दिन में ऐसा 20बार तक करते हैं।दो रेडिया लू जस्टिस ने तमाम लोगों के मुख़्तलिफ़ तरह के अल्ट्रासाऊंड रिपोर्टस का जायज़ा लिया जिनमें कड़ाके निकालने से पहले,बाद और दौरान के तसावीर बनाई गईं।

प्रोफ़ैसर बीवटन का कहना है कि वो ये देखकर हैरान रह गए कि जब कड़ाके निकालते हुए अल्ट्रासाऊंड का जायज़ा लिया गया तो जोड़ों के दरमयान एक तेज़ रोशनी सी नमूदार हो रही थी।इस का कहना है कि हम ये बात यक़ीन के साथ कह सकते हैं कि कड़ाके की वजह से जोड़ों के दरमयान प्रैशर में तबदीली आती है यानी जोड़ों में बुलबुले फूटते हैं।ताहम उन का कहना था कि इस बात पर अभी और तहक़ीक़ की ज़रूरत है कि रोशनी पहले फूटती है या कड़ाके पहले निकलते हैं।

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