इस पौधे को लगाने से आपके पितरो की हो जाती है मुक्ति देते है मनचाहा वरदान

दोस्तों आज इस लेख में हम आपको अपने पितरो को मुक्ति दिलाने में कुछ महत्वपूर्ण पौधों के बारे में बताने जा रहे है जिससे आपको मनचाहा वरदान प्राप्त हो सकता है ! कहा जाता है की श्राद्ध पक्ष में पितृ अपनी संतानों के बीच प्रथ्वी लोक पर आते है और संताने भी अपने पितरो के लिए अपने सामर्थ के अनुसार श्राद्ध कर्म , दान-पुण्य , आदि जैसे अनेक छोटे-छोटे कर्म करती है ! इन सभी कर्मो के अलावा एक ऐसा कर्म भी है जिनको करने से पितर अति प्रसन्न होते है ! शास्त्रों के अनुसार पितर पक्ष की पुन्य तिथि पर अपने पूर्वजो की याद में देव वृक्ष पीपल का पेड लगते है तो पितर बहुत प्रसन्न होते है !

पीपल वृक्ष लगाने से पितर किस प्रकार प्रसन्न होते है ये तो आप सोच ही रहे होगे ! पीपल वृक्ष को देव वृक्ष भी कहा जाता है क्योकि इसमें भगवान विष्णु वास करते है और लोगो का कहना भी है की पीपल पर ही पितरो का निवास स्थान होता है ! वही से श्राद्ध की तिथियों के अनुसार अपने परिजनों के पास शुक्ष्म रूप में आते है ! पितरो के नियमित निकाले गए अन्न को ग्रहण करके ये प्राण वायु के रूप में पीपल पर लौट जाते है ! अपने पितरो की याद में किसी मंदिर या पवित्र स्थान पर पीपल का पेड लगाना चाहिए ! पीपल वृक्ष की आयु सैकड़ो वर्ष होती है ! इस वृक्ष को लगाने से ही पितरो का आशीर्वाद भी चिर काल तक अपनी संतानों तक पहुच जाता है ! जिससे वे जीवन में फलते फूलते है !

मृत्यु के बाद भी क्रिया कर्म भी पीपल के वृक्ष के नीचे किये जाते है ! उन्हें मोक्ष मिल जाता है ! अगर तर्पण में तुलसी का प्रयोग किया जाये तो इससे भी पितर संतुष्ट होते है ! शास्त्रों में वृक्षों के अनुसार ग्रहों का प्रभाव रहता है ! इसीलिए ग्रहों के अनुसार वृक्ष की लकड़ी से पूजन करने से पितरो का आशीर्वाद जल्दी मिलता है ! 

वृक्ष के अनुसार ग्रह इस प्रकार होते है जिनमे उनका प्रभाव माना गया है 

मदार में :- सूर्य

पलाश में :- चंद्रमा

खैर में :- शनि

चिचड़ा में :- बुध

पीपल में :- ब्रहस्पति

गुलर में :- शुक्र

दूब में :- राहू

कुश में :- केतु

मनुष्य की तरह पेड – पौधों में भी जीव का वास माना गया है ! इसलिए देह-त्याग के बाद पीपल पर घंट बाधे जाते है ! पितरो को पिंड दान के बाद एक पौधा पीपल , बरगद , आम का पौधा जरुर लगाए क्योकि जब उस पौधे को लगाने के बाद उस पर जल डाला जाता है तो वह पितरो की मिलता है ! इसे ग्रहण करके वो तृप्त हो जाते है ! शास्त्रों में एक वृक्ष 10 पुत्रो के सामान माना गया है !

 

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