मायावती के गेम प्लान में फंसे राजा भईया, अखिलेश यादव ने लिया…

हेलो दोस्तो जितनी तेजी से चुनाव करीब आ रहा हैं उतनी ही तेज़ी से सियासी पारा चढ़ता ही जा रहा है, पार्टियां एक के बाद एक दांव खेला ही रही हैं. जहाँ एक तरफ महागठबंधन में आरएलडी को शामिल कर लिया गया तो वहीं दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने ऐसा दांव खेला है जिससे राजा भैया बुरी तरह फंस चुके हैं. दोस्तों मायावती और राजा भैया उर्फ रघुराज प्रताप सिंह के बीच की सियासी मतभेद के बारे में कौन नहीं जानता है. कहने को तो लोकसभा चुनाव में अभी कुछ समय है लेकिन अखिलेश यादव और मायावती ने मिलकर राजा भैया की मुसीबतें अभी से बढ़ा दी हैं.

दोस्तों लड़ाई सिर्फ मायावती और राजा भैया के बीच की थी लेकिन गठबंधन के कारण इस लड़ाई में मायावती का साथ दे रहे हैं अखिलेश यादव. अखिलेश यादव राजा भैया को चुनावी दांव पेचं में फसाने के लिए मायावती की पूरी मदद कर रहे है. पूरा मामला दरअसल यह है कि सपा के बहुत खास नेताओं में से एक राजा भैया पर सीओ हत्याकांड कराने का आरोप लगा था उस दौरान यूपी के सीएम अखिलेश यादव थे. अखिलेश यादव ने राजा भैया का मंत्री पद ले लिया, बाद में भले ही राजा भैया पर से सारे आरोप हटा दिए गए और वह निर्दोष साबित हो गए लेकिन अखिलेश यादव द्वारा उनका पद लिए जाने के कारण उन दोनों के बीच में एक कड़वाहट उत्पन्न हो गई.

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खबरें मिली है कि योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद जब राज्यसभा चुनाव हुए तो उस समय अखिलेश यादव ने राजा भैया से कहा कि वह बसपा प्रत्याशी को वोट दें लेकिन अखिलेश यादव द्वारा मंत्री पद छीन लेने के कारण राजा भैया ने ऐसा नहीं किया उन्होंने अखिलेश यादव की बात नहीं मानी और बसपा प्रत्याशी को वोट नहीं दिया जिसके बाद अखिलेश यादव ने राजा भैया को लेकर ट्विटर पर ट्वीट भी किया था. हालांकि बाद में इन्होंने अपने ट्वीट को हटा लिया लेकिन आज तक किसी को पता नहीं चला कि आखिर राजा भैया ने वोट किसे दिया.

कहा जा रहा है कि राजा भैया के उस समय राज्यसभा चुनाव में बसपा को वोट न देने का बदला लेने के लिए अखिलेश यादव ने प्रतापगढ़ की सीट को बसपा के कोटे में डाल दिया है. ऐसा कर के अखिलेश यादव ने भले ही राजा भैया की मुसीबतें बढ़ दी हो लेकिन उन्होंने चुनाव को लेकर एक खतरा भी ले लिया है क्योंकि प्रतापगढ़ में यदि सपा के प्रत्याशी को उतारा जाता तो सपा आसानी से जीत सकती थी क्योंकि प्रतापगढ़ में यादव और मुस्लिमों की संख्या अधिक है.

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भले ही सपा और बसपा से राजा भैया की बनती नहीं है लेकिन राजा भैया की प्रतापगढ़ में एक खास पहचान है यदि प्रतापगढ़ में सपा के प्रत्याशी को उतारा जाता तो गठबंधन को फायदा ही होता है लेकिन अखिलेश यादव ने गठबंधन का फायदा ना सोचकर मायावती के साथ मिलकर राजा भैया से बदला लेना ज्यादा बेहतर समझा. कहा जा रहा है सपा के अलावा अगर प्रतापगढ़ से किसी के जीतने की उम्मीद की जा रही है तो वह कांग्रेस है.

क्योंकि कांग्रेस का यहां पर वोट बैंक है इससे पहले कांग्रेस के टिकट पर राजकुमारी रत्ना यहां से चुनाव जीत चुकी है और उम्मीद की जा रही है कि इस बार भी राजकुमारी रत्ना को संसदीय चुनाव का टिकट दिया जाएगा. इस तरह गठबंधन के बारे में ना सोच कर राजा भैया को फसाना 2019 के चुनाव और महागठबंधन पर क्या प्रभाव पड़ेगा ये तो चुनाव के परिणाम ही बताएंगे.

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