54 साल बाद संतान प्राप्ति , 74 साल की महिला ने दिया जुड़वां बच्चों को जन्म, विश्व रिकॉर्ड

आंध्र प्रदेश में 50 साल से भी अधिक समय से मां बनने का इंतजार कर रही एक महिला ने 74 वर्ष की आयु में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया है। आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में द्रक्षरमम की ई मंगयम्मा ने गुंटुर के एक निजी अस्पताल में आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक से जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया।

74 साल की आयु में जुड़वां बच्चों को जन्म देने वाली ई मंगयम्मा

मंगयम्मा का विवाह साल 1962 में ई राजा राव के साथ हुआ था। हाल ही में जब उनके पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने 55 साल की आयु में कृत्रिम गर्भाधान के रास्ते से बच्चे को जन्म दिया, मंगयम्मा को भी लगा की यह रास्ता उनके लिए भी फलदायक हो सकता है और उन्होंने आईवीएफ तकनीक का इस्तेमाल करने का विचार बनाया।

डॉक्टरों का मानना है कि यह हो सकता है विश्व रिकॉर्ड

डॉक्टरों का कहना है कि यह एक विश्व रिकॉर्ड हो सकता है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के मुताबिक अब तक सबसे अधिक उम्र में मां बनने का रिकॉर्ड स्पेन की एक महिला के पास है, जिसने 66 साल की आयु में बच्चे को जन्म दिया था। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सनक्कायल अरुणा ने बताया कि महिला और दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।

अस्पताल के निदेशक डॉ. उमाशंकर ने बताया कि मंगयम्मा ने आईवीएफ तकनीक से मां बनने के लिए पिछले साल उनसे संपर्क किया था। इस साल जनवरी में उन्होंने गर्भधारण किया। आज उन्होंने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया है, दोनों स्वस्थ हैं। मंयगम्मा आईसीयू में है।

आंध्र प्रदेश के गुंटूर शहर के अस्पताल में गुरुवार को एक 74 वर्षीय महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. इन व्रिटो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया के माध्यम से गर्भ धारण करने वाली मंगायम्मा ने यहां अहल्या नर्सिग होम में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया. चार डॉक्टरों की एक टीम ने सिजेरियन ऑपरेशन किया. डॉक्टरों की टीम का नेतृत्व करने वाले उमाशंकर ने कहा कि मां और बच्चे दोनों स्वस्थ और ठीक हैं. पूर्वी गोदावरी जिले के नेललापतीर्पाडू की रहने वाली मंगायम्मा शादी के 54 साल बाद भी संतानहीन थीं.

मंगायम्मा ने अपने पति वाई. राजा राव के साथ मिल कर पिछले साल के अंत में नर्सिग होम में आईवीएफ विशेषज्ञों से संपर्क किया. इसके बाद नर्सिग होम ने दंपति की मदद करने का फैसला किया. डॉक्टर नियमित रूप से मंगायम्मा के स्वस्थ्य पर नजर बनाए हुए थे. यहां तक कि नर्सिग होम ने प्रसव से पहले दंपति के सत्कार की व्यवस्था की.

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