आजकल के माँ-बाप जाहिल क्यूँ हैं? हर माँ-बाप को ये बयान ज़रूर सुनना चाहिए, मौलाना तारिक ने फ़रमाया…

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों लोग सवाल पूछते हैं कि क्यों आज की जेनरेशन के बच्चे इतने बिगड़े हुए है क्यों वो माँ बाप से बगावत करते हैं ? तो आइए आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देते हैं। मेरे भाइयों आज के जमाने में सारी मांए स्कूल की टीचर बनी हुई है यह इतनी बेवकूफ होती हैं कि जितनी मेहनत खाना बनाने में करती हैं अपने कपड़ों को सजाने में करती हैं अगर उस का 100 वां हिस्सा भी यह अपने बच्चों के साथ करें तो शायद इनके बच्चे जुनैद बगदादी बन जाए ।आज के माँ बाप ,बच्चे जैसे ही 3 साल के हुए उन्हें स्कूल के हवाले कर देते हैं उसके बाद ट्यूशन लगवा देते हैं बच्चे ना हुए ये रोबोट हो गए.

कभी इधर भेजती है तो कभी उधर भेजते हैं और इसी चक्कर में उन्हें ना ढंग से A समझ में आता है ना B। आइए आपको बताते हैं हमारे प्यारे नबी का वाकया वह अपने नवासों हसन और हुसैन के बीच में कुश्ती करवाया करते थे हुसैन छोटे थे और हसन बड़े थे तो जाहिर है हसन हुसैन को दबा रहे होंगे यह देख कर आप हुसैन को कहने लगे कि शाबाश हुसैन और ज़ोर लगाओ ,हुसैन और ज़ोर लगाओ यह देखकर बीवी फातमा बोली जो जन्नत में औरतों की सरदार है ,या रसूल अल्लाह आप सारी शाबाशी हुसैन को ही क्यों दिए जा रहे हैं हसन को नहीं।तब आपने कहा कि मेरे बगल में जिब्राइल खड़े हैं वह हुसैन को शाबाशी दे रहे थे इसलिए मैं भी हुसैन को ही शाबाशी देने लगा.

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इससे भी बड़ा वाक्या सुनो कि जब आप रसूल अल्लाह मस्जिद में फर्ज नमाज़ पढ़ाते थे तब जब आप सजदे में गए तो हसन ने छलांग लगाई और आपकी पीठ पर जाकर बैठ गए और वो इतनी देर तक बैठे की मेरे नबी ने सजदा लंबा कर दिया ।इतना लंबा सजदा कर दिया कि पीछे के लोग सोचने लगे कि कहीं अल्लाह के नबी फौत तो नहीं कर गए। तो जो सबसे आगे वाली सफ उसमे से किसी ने झांक कर देखा तो अल्लाह के नबी की पीठ पर हसन बैठे हुए थे जब उन्होंने ऐसा देखा तो उन्होंने सोचा कि आगे हाथ बढ़ा कर उन्हें अल्लाह के रसूल की पीठ से हटा दूँ.

जब अल्लाह के रसूल ने अपनी बगल से देखा कि पीछे से कोई हाथ आगे आ रहा है तो उन्होंने सजदे से ही अपना हाथ हिलाकर उन्हें मना कर दिया की मेरे बच्चों को मत हटाओ और जब तक हसन उतरे नहीं आप सजदे में ही थे। एक वह जमाना था और एक आज का जमाना है आज के जमाने के मां बाप बड़े ही जाहिल है वह अपने बच्चों को मार के डांट के अपनी बात मनवाना चाहते हैं जबकि ऐसा करने से बच्चों के दिल में उनके लिए बगावत पैदा हो जाती है। मैं अपना एक किस्सा बताना चाहूंगा जब मैं बहुत छोटा था 7 साल की उम्र में ही मुझे सिगरेट पीने की लत लग गई थी.

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एक बार मेरी मां को पता चल गया कि मैं सिगरेट पीता हूं तो उन्होंने मुझे बहुत मारा और मेरा मुंह जोर से खोला और मेरी मौसी अंगारा लेकर मेरे मुंह के पास आती और कहती कि बोल तेरा मुंह जला दूं बोल ये अंगारा क्या तेरे मुंह में डाल दूँ। आज के बाद सिगरेट मत पीना तब मैं रोने लगा और चिल्लाने लगा कि नहीं मैं आज के बाद सिगरेट कभी नहीं पियूंगा मेरी बात को सुनकर उन लोगों ने मुझे छोड़ दिया और मैं जैसे ही घर से बाहर निकला मैंने तुरंत ही सिगरेट खरीदा और पीना शुरू कर दिया.

उसी वक्त मेरा छोटा भाई जो कि मुझ से 2 साल ही छोटा था उसने मुझे सिगरेट पीते हुए फिर से देख लिया मैं डर गया कि अब तो यह जाकर मां से बता देगा तो मैंने उसे भी बुलाया और कहा कि तू भी पी ले लेकिन वहां से कुछ मत कहना। यही वजह है मेरे भाइयों की मैं कहता हूं कि आज के जमाने के मां बाप बड़े ही जाहिल है वह अपने बच्चों को मार के डांट के कुछ भी सिखाना चाहते हैं जबकि मां बाप को हुक्म है कि वह अपने बच्चों को प्यार से दुलार से और लाद करके समझाएं ।मारने पीटने से बच्चों के दिन में मां बाप के लिए नफरत पैदा हो जाती है और वह आगे चलकर बगावत करने लगते हैं.

अल्लाह के नबी ने कहा है कि 7 साल तक बच्चे को माँ अपने गले से लगा कर रखे। प्यार करे दुलार करे,7 साल तक तो नमाज़ तक को न कहे ।नमाज़ जो अल्लाह ने फ़र्ज़ करार दिया है लेकिन बच्चों से वो भी न कहो। जब बच्चा10 साल का हो जाय तब उसको तम्बीह करो कि बेटा अब तुम नमाज़ पढो ।और 15 साल से उस बच्चे पर नमाज़ फ़र्ज़ होती है ।और आज कल तो 3 साल हुए नहीं कि स्कूल भेज दिया ।बच्चा भगावत नहीं करेगा तो क्या करेगा.

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