आखिर क्यों अपनी ही पुत्री से ब्रह्मा जी ने किया था विवाह, कारण जानकर आप भी हो जाएंगे हैरान

ब्रह्मा जी इस पूरी सृष्टि के रचयिता हैं इस बात सी कोई भी अनजान नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की मां सरस्वती ब्रह्मा जी की पुत्री हैं। हिन्दू धर्म के दो ग्रन्थों सरस्वती पुराण और मत्स्य पुराण में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का अपनी बेटी सरस्वती से विवाह करने का प्रसंग है। ब्रह्मा जी ने अपनी ही बेटी से विवाह करने जैसा निंदनीय काम क्यों किया? इस बात को सभी सोचते हैं कि आखिर ऐसी भी क्या बात थी कि ब्रह्मा जी को अपनी बेटी से विवाह करना पड़ा। तो आइए जानते हैं इन सारी बातों के बारे में।

मत्स्य पुराण अठारह पुराणों में से एक मुख्य पुराण है। इस पुराण के अनुसार सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने अपनी शक्ति से विद्या की देवी सरस्वती को जन्म दिया था। कहा जाता है कि सरस्वती मां की कोई माता नहीं थी केवल उनके पिता ब्रह्मा ही थे। मत्स्य पुराण के ही अनुसार ब्रह्मा जी के 5 सिर थे। ब्रह्मा जी ने अपनी शक्ति से सृष्टि की रचना की थी और उस दौरान वे ब्रह्माण्ड में अकेले थे। उसी समय उन्होंने अपनी शक्ति का प्रयोग कर सांते , सरस्वती तथा ब्राह्मी कि उत्पत्ति की। इन तीनों लोगों में से मां सरस्वती काफी सुंदर थीं। इसलिए ब्रह्मा अपनी बनाई हुई उत्पत्ति पर ही आकर्षित होने लगे।

पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी उन पर लगातार अपना नजर रखते थे। उनकी दृष्टि से बचने के लिए सरस्वती जी इधर से उधर छुपती रहती थीं। वे सफल नहीं हो पा रही थीं इस लिए उन्होंने आकाश में छुपने कि सोची और जा कर छुप गई आकाश में।लेकिन फिर भी वहां भी ब्रह्मा जी ने अपने पांचवे सिर की मदद से उन्हें ढूंढ़ निकाला तथा उनसे सृष्टि की रचना करने में सहयोग करने के लिए कहा। सरस्वती जी ने स्वीकार कर लिया और तब उनका विवाह सरस्वती जी से हो गया और तब मनु का जन्म हुआ। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी और सरस्वती जी के संतान मनु ही पहले मानव थे जिन्होंने धरती पर जन्म लिया था। इसके अतिरिक्त वेदों , सनातन धर्म तथा संस्कृति भाषा का जनक भी कहा जाता है।

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