गठ’बंधन टू’टने के बाद अखिलेश लेंगे बड़ा फ़ैसला, भाजपा में भी मची हुई है ख़लबली

लोकसभा चुनाव में हार के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने अपने रास्ते अलग कर लिए हैं. बसपा ने इस बारे में घोषणा की और कहा कि आने वाले उपचुनाव में वो अकेले ही मैदान में उतरेगी जबकि बसपा प्रमुख मायावती के बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसी तरह का जवाब दिया. जहां मीडिया इसे इस तरह से प्रचारित कर रहा है कि बसपा और सपा फेल हो गए हैं लेकिन सपा अध्यक्ष ने इसको लेकर एक अलग ही रणनीति बना ली है.

अखिलेश यादव के क़रीबी मानते हैं कि समाजवादी पार्टी अब अपने पुराने लुक में आने के लिए तैयार है. अखिलेश अब मौके की तलाश में हैं और जल्द ही वो कोई चौंकाने वाला कदम उठा सकते हैं. पार्टी में ज़ोर-शोर से ये चर्चा है कि शिवपाल यादव पार्टी में पुनः वापसी करेंगे. बताया जा रहा है कि उन्हें सपा उत्तर प्रदेश अध्यक्ष का पद देगी. दूसरी ओर बात सिर्फ़ इतनी नहीं है, बात ये भी है कि सपा अब कई नेताओं को बाहर का रास्ता भी दिखाने वाली है.

सूत्रों की माने तो पार्टी के कई नेताओं को इस बात का अंदाज़ा भी हो गया है और उन्हें लग रहा है कि जल्द ही उनका पत्ता कट सकता है. इन नेताओं में कुछ ऐसे नाम भी हैं जो बहुत नामी माने जाते हैं. बताया जा रहा है कि प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव का क़द भी कम किया जाएगा वहीँ शिवपाल के आने के बाद कई पुराने समाजवादी नेता वापिस आयेंगे.

अखिलेश इस मामले में पूरी रणनीति अपना रहे हैं. इतना ही नहीं अखिलेश प्रदेश की छोटी पार्टियों को अपने साथ लेकर चलने की योजना बना रहे हैं. सपा इस बात को पूरी तरह से मान चुकी है कि अब उसे जनता के बीच अभी से ही जाना होगा. आज़मगढ़ में अखिलेश जिस अंदाज़ में सभा करने गए उससे एक नया लुक उनमें दिखा. अखिलेश अब नए अंदाज़ में राजनीति करने वाले हैं ये बात लोगों को समझ आ गई है.

अखिलेश के नए रवैये से भाजपा में भी हलचल है. भाजपा के लोकल नेता इस बात को जानते हैं कि अभी सपा का उत्तर प्रदेश में मज़बूत कैडर है और अगर इन्हें सीधी राह मिली तो सपा को बड़ी कामयाबी मिलने में देर नहीं लगेगी. सपा-बसपा गठबंधन के टूटने से भी सपा को ही ज़्यादा फायदा होने की उम्मीद है. इसका कारण ये है कि सपा का पारम्परिक वोट बैंक उसके पास पूरी तरह से वापिस आ जाएगा.

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