दशहरा स्पेशल: मृत्यु से पहले रावण ने लक्ष्मण को दिए थे जीवन से जुड़े 5 मंत्र

ravan gave these advises to lakshman before death

विजयदशमी या दशहरा का त्योहार बुराई पर अच्छाई का प्रतीक होने के चलते लोगों को सच्चाई की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। इस बार दशहरे का पावन त्योहार 15 अक्तूबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान राम ने लंकापति रावण का वध कर माता सीता को कैद से मुक्त करवाया था। मगर बात हम रावण की करें तो राक्षसों का राजा होने के साथ वह एक ब्रह्माण का पुत्र था। ऐसे में श्रीराम के बाण से घायल होकर जब वह मृत्यु के द्वार पर पहुंचने वाला था तब उसने लक्ष्मण जी को जीवन से जुड़े 5 मंत्र दिए थे। तो चलिए आपको बताते हैं उन मंत्रों के बारे में…

पहला उपदेश – शत्रु को कभी भी खुद से कमजोर ना समझे

रावण ने लक्ष्मण जी को पहला उपदेश दिया कि हमें कभी भी अपने दुश्मन को कमजोर समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। ऐसा सोच कर हम आपनी पूरी ताकत नहीं लगाते हैं। ऐसे में वो हमें हरा सकता है।

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दूसरा उपदेश – ताकत का गलत प्रयोग करना

जीवन के किसी भी मोड़ पर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। गलत व कमजोर इंसान पर अपनी ताकत दिखाने का कोई मतलब नहीं होता है। साथ ही अपनी ताकत पर किसी भी तरह का घमंड नहीं करना चाहिए। हो सकता है आज कोई आपके कमजोर है। मगर आपके घमंड के चलते वह आपको हरा दें।

तीसरा उपदेश – मित्र व शत्रु का फर्क पता करें

रावण के मुताबिक, हर किसी को मित्र व शत्रु के बीच के फर्क पता होना चाहिए। असल में, बहुत बार हम जिसे अपना हितैषी समझते हैं वे दुश्मन निकलता है। इसके विपरित जिसे शुभचिंतक समझने की भूल करते हैं वहीं सबसे बड़ा दुश्मन निकलता है।

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चौथा उपदेश – पराई स्त्री पर बुरी नजर नहीं रखनी चाहिए

कभी भी किसी की स्त्री पर बुरी नजर नहीं रखनी चाहिए। असल में, वह व्यक्ति के विनाश का कारण बनती है। बात अगर रावण की ही करें तो वह माता सीता को अपनी महारानी बनाने का सपना देखता था। मगर असल में इसी वजह से उसका जीवन खत्म हो गया। इतना ज्ञानी होने के बाबजूद भी उसकी एक गलती उसे विनाश की ओर ले गई।

पांचवां उपदेश – अपनों की बात मानना

जीवन में हमेशा अपने से बड़े का कहना मानना चाहिए। असल में, उन्होंने हमसे ज्यादा जिंदगी को देखा व समझा होता है। ऐसे में वे हर मोड़ पर हमें सही राह पर चलने की सीख देंगे।

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