जो औ’रतें बैठ कर नमा’ज़ पढ़’ती हैं उनके लिए ज़’रूरी है ये बात, इसको सम’झने की..

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों आज हम लाय है एक ऐसे सवाल का जवाब जिसके बारे में लोग अक्सर ही जानना चाहते हैं दोस्त लोगों का पूछना है कि क्या बैठ कर नमा’ज पढ़ सकते हैं तो आइए आज हम बताते हैं आपको कि क्या बैठ कर नमा’ज पढ़ सकते हैं या नहीं? दोस्तों एक आदमी ने मुझसे सवाल किया कि क्या बैठ कर न’माज पढ़ा जा सकता है तो इसका जवाब यह है कि अगर आप खड़े होकर न’माज़ पढ़ते हैं तो आपको पूरा सवाब मिलता है लेकिन अगर आप वही न’माज बैठकर पढ़ते हैं तो आपको आधा सवाल मिलता है और अगर आप लेट कर नमा’ज पढ़ते हैं तो आपको आधे का भी आधा सवाब मिलता है.

उदाहरण के लिए अगर खड़े होकर 100 नेकियाँ मिलती हैं तो बैठ कर नमा ज पढ़ने पर 50 ही नेकिया मिलेंगी और लेट कर न माज पढ़ने से सिर्फ 25 नेकिया मिलती है ।यही वजह है कि बुजुर्गों ने कहा है कि अल्लाह को जवानी की इबादत और नमा ज ज्यादा पसंद आती है क्योंकि जवानी में इंसान खड़े होकर ज्यादातर नमा ज पढ़ता है लेकिन बुढ़ापा आते ही लोग ज्यादातर न माजे बैठकर ही पढ़ते हैं और नीकियां आधी हो जाती हैं.

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मेरे भाइयों एक ग़लतफहमी और है जो लोगो मे बहुत ज़्यादा है कि औ’रतों को बैठ कर न माज़ पढ़ना चाहिए।और अक्सर ही देखा गया है कि और’तें बैठ कर ही न माज़ पढ़ति हैं।मेरे भाइयों मेरी बहनों नमा ज़ सबके लिए बराबर है न माज़ सबको खड़े रह कर ही पढ़ना होता है अगर औ’रते बैठ कर नमा;ज़ पढ़ती है तो उनको आधा ही सवाब मिलता है और सबसे बड़ी बात तो ये है कि बैठ कर या लेट कर न’माज़ सिर्फ उनकी क़ुबूल हो सकती है जो खड़े नहीं हो सकते हैं।जो पूरी तरह से सेहतमंद है फिर भी बैठ कर न’माज़ पढ़ते है उनकी नमा’ज़ अल्लाह क़ुबूल ही नहीं करता है.

अल्लाह ने कहा है कि इबादत खड़े हो कर ही कि जायगी अगर किसी वजह या मजबरी के तहत खड़े न हो सके तो बैठ कर नमा’ज़ पढ़े ,न बैठ सके तब लेट कर नमा’ज़ पढ़े ।लेकिन अब तो जितनी औ’रते है वह सब बैठ कर ही न’माज़ पढ़ती है क्योंकि वह और’त हैं।अगर ये किसी गलत इल्म की बुनियाद पर बैठ कर नमा’ज़ पढ़ती हैं तो उनको आधा ही सवाब मिल रहा होता है लेकिन अगर वह सब कुछ जानकर बैठ कर न’माज़ पढ़ रही हैं तो उनकी न’माज़ मानी ही नहीं जायगी.

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मर्दों में ये गलतफहमी होती है कि नफिल न’माज़ बैठ कर पढ़ना चाहिए मग़रिब में मैंने देखा कि एक शख्स 3 रकात खड़े होकर नमा’ज़ पढ़ रहा हैं 2 रकात खड़े होकर पढ़ रहा हैं लेकिन आखरी की दो रकात में वह बैठ जाता हैं। मुझे लगा कि 5 रकात की ही ताकत के सामने वाले में इसीलिए वह 2 रकात में बैठ गया ।ऐसा दो तीन चार दिन हुआ फिर मैंने पता किया तो पता चला कि लोगों का अकीदा है कि नफिल बैठ कर पढ़ना चाहिए। जबकि हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने कभी भी नफिल नमा’ज बैठकर नहीं पढ़़ी.

जब आप बीमार हुए हैं तब आपने बैठकर भी फर्ज न’माज पढ़ी और लेट कर भी नमा’ज पढ़ ली ।आपने बीमारी की हालत में बैठ कर न’माज पढ़ाई भी ।लेकिन वह एक अलग सूरत थी क्योंकि उस वक्त आप बीमार थे उन्होंने यह पैगाम दिया कि जब आप बीमार हो सिर्फ तब ही आप बैठ कर या लेट कर नमा’ज पढ़ सकते हैं ना कि सेहतमंद होकर भी न’माज बैठकर या लेट कर पढ़ें। नमा’ज सिर्फ और सिर्फ खड़े होकर ही है चाहे वह फर्ज न’माज हो सुन्नत न’माज हो या नफिल नमा’ज हो.

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