वैज्ञा’निकों ने ढूँढ निकाली नूह(A.S.) की कश्ती, बीबीसी और नेशनल जियोग्राफिक पर भी..

हज़रत आदम अलैहिस सलाम के दुनिया में आने के बाद उनकी औलादें दुनिया में ख़ूब फली. मगर एक मुद्दत के गुज़र जाने के बाद ऐसा भी हुआ कि लोग अ’ल्लाह को भूल चुके थे और बजाय एक ख़ुदा के उन्होंने मिट्टी और पत्थर की बुनियार पर कई ख़ुदाओं को बना लिया. यए लोग उनसे ही अपनी मुरादें माँगने लगे. हज़रत नूह अलैहिस सलाम ने अपनी कौम को अल्ला’ह ताला के एहसान और उनके रास्ते पर चलने की तरकीब बताई थी।

उन्होंने कहा कि क्या आप जानते हैं कि इस वक़्त हज़रत नूह अलैहिस सलाम की कश्ती के बारे में आप कहां है। इस मामले में वैज्ञानिकों को जवाब मिल गया है कि अब हज़रत नूह अलैहिस सलाम की कश्ती कहां है। ये जानकार आपको भी है’रत होने वाली है. हज़रत नूह अलैहिस सलाम को आदम ऐ सांई भी कहा जाता है। क्योंकि अ’ल्लाह ने नूह अलाहिस सलाम की कौम को उसकी नाफ़रमानी करने की वजह से पानी में डुबोकर ग’र्क कर दिया था.

उन पर आने वाली की तादाद 80 थी, सवार थे और इस कश्ती पर हर किस्म के जानवरों का एक एक जोड़ा भी मौजूद था। आपको बता दें कि दूसरे धर्मों की किताबों में भी इस तरह की किश्ती का वाक़या है. चीन के एक ईसाई खोजकर्ता वैज्ञानिक ने कई महीनों की पड़ताल के बाद साल 2010 में यह ऐलान किया कि हमने नूह अलैहिस सलाम की कश्ती को ढूंढ निकाला है। यह कहती कि तुर्की में बर्फीली पहाड़ी की चोटी पर ये किश्ती मिली है।

जिसकी ऊंचाई 12 फीट है। बीबीसी और नेशनल जिओग्राफिक पर भी इस टीम की रिपोर्ट को दिखाया गया था। जिसमें बताया गया है कि पिछले 200 सालों से तकरीबन एक दर्जन से ज्यादा टीमें हजरत नूह अली सलाम की कश्ती को तलाश कर रही थी। जिसके बारे में कुरान में आता है कि वह एक चोटी से ट’कराकर रुक गई थी। चीन के इस दावे को अमरीका ने मानने से इनकार किया।

उनका कहना है कि इस कश्ती के लकड़ी के टुकड़ों से यह नि’ष्कर्ष निकलता है कि यह हजरत नूह अली सलाम की कश्ती नहीं है। क्योंकि यह लकड़ी इतनी पुरानी नहीं है। जबकि चीन के वैज्ञानिकों का दावा है कि वह 99.9% यकीन से कह सकते हैं कि यह वही कश्ती है। जो हजरत नूह अलैहिस सलाम ने 4800 साल पहले अल्ला’ह के हु’क्म से बनाई थी।

चीन के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कश्ती में तीन मंजिलें हैं और इसमें कई बड़े बड़े कमरे हैं। इन कमरों में लकड़ी के सुकून है और तुर्की के खोजकर्ताओं ने कुरान में लिखे नूह अलैहिस सलाम के वाक्य के जरिए इस कश्ती को ढूंढा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कश्ती का हर कमरा 5 मीटर ऊंचा है। जिसमें कोई भी जानवर आसानी से आ सकता है। चीनी वैज्ञानिकों ने कश्ती के टु’क’ड़ों की रेडियो कार्बन टेक्नोलॉजी से जांच की और दा’वा किया कि यह 4000 साल पुरानी कश्ती है।

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