एक नाशुक्री औरत का किस्सा, बीवी की इस हरकत ने खाविंद को मालामाल कर दिया…

अस्सलामोअलैकुम भाइयों और बहनों आज हम आपको एक नाशुक्री औरत का वाक्या बताएंगे- एक सीधे-साधे सब्र करने वाले इंसान की बीवी बहुत नाशुक्री, बद जुबान और बेसब्री थी। अपनी बीवी की वजह से वह इंसान बहुत परेशान रहता था। एक दिन जब खाने को घर में कुछ ना था और उसे कोई काम ना मिला तो वह दिनभर थका हारा घर लौटा तो उसने अपने शौहर को खूब उल्टा सीधा कहा कि बच्चे भूख से म-र रहे हैं और तुम बिना कामकाज के घर में बैठे हो। कुछ कमा कर लाओ, बैठ कर काम नही चलेगा बच्चों की भूख प्यास दूर हो.

यह सुनकर उसका शौहर कहने लगा कि रात के वक्त हल्ला गुल्ला मत करो,सब सोरहे हैं सुबह काम पर जाऊंगा और जो पैसे मिलेंगे सब लाकर के तुम्हें दे दूंगा। सुबह हो गई इंसान मजदूरी करने के लिए गया लेकिन उसे कोई काम ना मिला जब उसने देखा कि सब अपना काम कर रहे हैं और उसे कोई काम नहीं दे रहा है तो वह जंगल में जाकर के सुबह से इशा की नमाज़ तक अल्लाह ताला की इबादत करने लगा और फिर उसके बाद रात को धीरे से घर में आ गया उसे डर लगा था कि वह घर आएगा तो फिर उसकी बीवी चिल्लाएगी पैसा नहीं लाए खाने को कुछ नहीं है.

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रात को जब उसकी बीवी की आंख खुली तो उसने पूछा कि कहां थे और क्या कमा करके आए हो पैसे कहां हैं तो उसने कहा कि मैंने जिसका काम किया है उस मालिक ने कल पैसे देने का वादा किया है बहुत रहीम है। औरत गुस्से से बोली मेरे बाल बच्चे भूखे म-र रहे हैं और आप वादा कर रहे हैं सुबह फिर वह मजदूरी करने के लिए गया लेकिन फिर उसे कोई काम ना मिला और फिर सुबह से लेकर रात तक उसने अल्लाह ताला की इबादत की फिर जब वह घर गया तो उसकी बीवी पूछने लगी कि दोनों दिन की मजदूरी लाए हो तो उसने डरते हुए जवाब दिया कि नहीं तीनो दिन की मजदूरी एक साथ देने का कहा है तो उसकी बीवी गुस्से से कहने लगी कि अपना भला चाहते हो तो तीनों दिन की मजदूरी साथ लेकर आना नहीं तो अपना मुंह ना दिखाना.

उसकी बीवी ने एक थैली उसे दी और कहा कि तीनो दिन की मजदूरी इस में रख कर ले आना वह फिर थैली लेकर के काम पर निकल गया लेकिन तीसरे दिन भी उसे कोई काम ना मिला और वह जंगल में जा कर इबादत ए इलाही में मशगूल हो गया और जब रात हो गई तो उस थैली में बीवी के डर से उसने बहुत सारी रेत भर ली और उसे लेकर के घर पहुंचा तो वहां हालात कुछ अलग ही थे घर के बाहर से ही ऐसी खुशबू आरही थी जो चारो तरफ फैली थी वह देखता रह गया। उसी वक्त उसकी बीवी खुश होकर घर से बाहर निकल कर आई और उसने पूछा अपनी बीवी से आखिर क्या बात है तो उसने कहा कि घर में चलो मैं तुम्हें बताती हूं तो उसने उसे पूरी बात बताई और कहा कि तुम्हारा हाकिम बहुत अच्छा है मैं घर में बच्चों के खाने पीने की फिक्र में बैठी हुई थी तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और दरवाजे पर एक घुड़सवार खड़ा था और उसने कहा कि अपने शौहर की 3 दिन की मजदूरी लेलो अब उसको कुछ सुनाना नहीं है और परेशान मत करना.

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उससे कह देना यह तुमने जितनी मेहनत की थी उतनी तुम्हें मजदूरी मिल गई ज्यादा करता तो और ज्यादा पाता और हमेशा अपने शौहर का ख्याल रखना और उसने एक थैली उसे दे दी जिसमें 50 दिरहम थे। यह सुन कर के वह अल्लाह का शुक्र अदा करने लगा और सजदे में जागिरा और वह बेहोश हो गया और जब उसे होश आया तो उसने अपनी बीवी से कहा ऐ नाशुक्री औरत मैंने तीनों दिन किसी का काम नहीं किया सिर्फ दिन और रात इबादत ए इलाही में गुज़ार दिया.

रात को आकर तुम्हारे डर से यह कहता था कि मालिक ने कल मजदूरी देने का कहा है लेकिन अल्लाह ताला ने उसे सच्चा कर दिखाया तेरी रात दिन की आफत और बवाल से मुझे निजात दे दी मैं जितना भी अपने रब का शुक्र अदा करूं वह कम है आज मैं तुम्हारे डर से इस थैली में रेत भरकर लाया था जाओ इसको खाली कर लो और इसको फेंक दो जब उसकी बीवी ने थैली खाली की तो देखा उसमें सोना जवाहरात भरे हुए थे जिससे पूरा घर जगमगा उठा यह हाल देख कर के उस इंसान ने अपनी सारी उम्र अल्लाह की इबादत में गुजारने का इरादा कर लिया.

मेरे भाइयों और बहनों जो बंदा अल्लाह पर यकीन रखता है और उसकी इबादत करता है और उसका शुक्र अदा करता है। अल्लाह उसे कभी खाली हाथ नहीं रखता और अल्लाह ताला भी उसकी गैब से मदद करते हैं अल्लाह ताला हम सब को भी इस वाकए से सबक दे और अपना शुक्र करने वाला बनाएं और हमें अमल करने की तौफीक अता फरमाए आमीन.

One thought on “एक नाशुक्री औरत का किस्सा, बीवी की इस हरकत ने खाविंद को मालामाल कर दिया…”

  1. Isme ye aurat nashukri kaise ho gyi?
    Apne shohar se bhi bolegi to kisse bolegi.
    Aur kamayega nhi to obviously bhuke hi marenge
    Vaise bhi khuda unhi ki madad krta h jo khud ki madad krte h.

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