चाणक्य नीति: मतलबी लोगों की 3 पहचान जीवन में कभी धोखा नहीं खाओगे

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चाणक्य की नीतियां मनुष्य के जीवन में होने वाली घटनाओं या परिस्थतियों पर ही काम नहीं आतीं, बल्कि उनकी नीति से जीवन में मनुष्य को कैसे और क्या चीजें करनी और क्या चीजे नहीं करनी चाहिए यह भी जाना जा सकता है। चाणक्य ने इसी क्रम में मनुष्य को तीन चीजों को करने से पहले बहुत ही सोच-विचार करने का निर्देश दिया है। उनका मानना था कि यदि तीन चीजें मनुष्य बिना सोचे-विचारे कर दे तो जीवन में उसे कभी न कभी बेहद पछतावे का सामना करना पड़ता है। ये तीन चीजें हर किसी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं और इन अमल करने से पहले विचार जरूरी है।

चाणक्य ने मुनष्य को जीवन में कसम, कलम और कदम का चुनाव करते हुए बहुत सतर्क रहने की जरूरत होती है। ये तीनों ही चीजें हर युग में महत्वपूर्ण रहीं हैं। इन तीन चीजों पर निर्णय लेना कई बार कुछ परिस्थतियों में आसान नहीं होता, लेकिन बुद्धि-विवेक के बल पर इसे आसान किया जा सकता है। तो आइए जानें कि ये तीन चीजें क्यों बिना विचारे नहीं अमल नहीं करनी चाहिए।

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मतलबी लोगों की 3 पहचान जीवन में कभी धोखा नहीं खाओगे

1. मतलबी इंसान अपना काम पड़ने पर हमेशा आपकी खुशामदी करता रहेगा और जब उसका काम निकल जाएगा तो वो आपसे आपका हाल भी नहीं पूछेगा.2. हर मतलबी इंसान अपना काम कराने से पहले आपको काफी कुछ खिलाएगा – पिलाएगा और आपके साथ रहेगा. जबतक की उसका वो काम ना हो जाए जिसके लिए वो आपसे चिपका हैं. काम खत्म होने के बाद वो आपको एक कप चाय के लिए भी नहीं पूछेगा.3. जो इंसान आपसे कभी प्यार से बात नहीं करता और अचानक कभी प्यार बरसने लगे तो समझ जाइए उससे आपको कुछ काम जरूर है. मतलबी इंसान अपने काम निकालने के लिए बेहद ही नरम और प्यारे तरीके से बात करता हैं.

शपथ या कसम लेने से पहले दस बार सोचें

चाणक्य ने अपनी नीतियों में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि आप किसी काम के लिए शपथ ले रहे हैं तो कम से कम दस बार विचार कर लें। भावावेश में आ कर ली गई कसम या शपथ आपके जीवन में पछतावे का कारण बन सकता है। शपथ जीवन का वो निर्णय होता है जिसे उठाने से पहले आपको खुद पर भरोसा ही नहीं बल्कि अपने परिस्थितियों और उससे पड़ने वाले प्रभाव पर चिंतन करना होता है। बिना सोचे समझे कोई भी शपथ या मो पूरी नहीं हो पाती या पूरी हो भी जाए तो उस पर पछतावा कायम रहता है।

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कलम से कुछ भी लिखते समय धैर्यता और विवेक जरूरी है

कलम एक हथियार माना गया है। लिखा हुआ मिटाना आसान नहीं होता है, इसलिए कुछ भी लिखने से पहले दस बार सोचना चाहिए कि जो भी आप लिख रहे हैं वह कितनो के लिए हितकारी और कितनों के लिए हानिकारी साबित हो सकता है। एक अच्छा विचार इंसान को सही मार्ग दिखाता है, लेकिन एक विध्वसंक विचार नष्टकारी बन सकता है। इसलिए यदि आप ऐसे पद या ओहदे पर हैं जिससे आपकी लेखनी का प्रभाव बहुतों पर हो सकता है तो आपको हमेशा कुछ भी लिखने से पहले बहुत सोच-विचार करना चाहिए।

कदम या निर्णय कभी भावावेश में नहीं लेना चाहिए

भावनाओं में उठाया गया कदम जीवन को गर्त में ले जाता है। इसलिए जब भी कोई निर्णय लें तो अपनी भावनाओं पर काबू रखें। त्वरित निर्णय पर काम नहीं करना चाहिए, खास कर जब आप बेहद गुस्से या में हों अथवा बेहद दुखी हों। यही नहीं अति प्रसन्नता में भी लिया गया निर्णय इंसान सही नहीं होता, इसलिए जब भी किसी कार्य के लिए निर्णय लें तो बहुत सुकून और विचार के साथ लेना चाहिए। आपके निर्णय का असर किस-किस पर क्या-क्या होगा, यह सोच कर लेना चाहिए। एक गलत निर्णय आपके जीवन भर के पछतावे का कारण बन सकता है।

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