रोमां’च से भरपूर हैं सोनल सोनकवड़े की “Comma” और “So What”

हर एक किताब अपने आप में कुछ नया सा एहसास लिए होती है. कुछ अपने ही मन के पुराने सवालों को मन में नया करती है तो कुछ अनजाने सवालों के जवाब भी हमें किताब दे जाती है. इसी तरह का एक उपन्यास है सोनल सोनकवड़े का “कॉमा”, इस उपन्यास के बारे में हमें जब कुछ साहित्य से जुड़े लोगों ने बताया तो हमने भी सोचा कि क्यूँ न इस उपन्यास को पढ़ा जाए.

इस उपन्यास को पढ़ते हुए एक अलग सा एहसास महसूस होता है. अंग्रेज़ी भाषा की किताब “कॉमा” पढ़ते वक़्त ऐसा मालूम होता है कि जैसे परी के जीवन को और बेहतर तरह से जानें और उसकी ज़िन्दगी को उसके नज़रिए से समझने की मज़बूत कोशिश करें. कहते हैं कि लेखक सबसे पहले तो इंसान ही होता है, एक ऐसा इंसान जो ज़िन्दगी के अलग-अलग टुकड़ों को समेट कर उससे कई ज़िंदगियाँ बनाता है. सोनल का लेखन सहज है और पढ़ने में बोरियत पैदा नहीं करता.

इस किताब को पढ़ते-पढ़ते हमें अचानक ही से ये मालूम हुआ कि सोनल की “सो व्हाट” किताब भी जारी हो चुकी है. ये “कॉमा” का प्री-क्वल है”. इस किताब में भी उसी तरह का रोमांच है जो “कॉमा” में हमें मिला. इस उपन्यास के बारे में मशहूर हिन्दी-उर्दू साहित्यिक वेबसाइट “साहित्य दुनिया” में जो कहा गया है वो कुछ इस तरह है,”सोनल सोनकवड़े का ये दूसरा उपन्यास है लेकिन जिस तरह से वो पहले उपन्यास में बाँधकर रखने में सफल हुई थीं वैसे ही इस उपन्यास का असर भी हुआ। कॉमा में जिस मज़बूत ऑफ़िसर परी को हमने पाया था वो किस तरह से इतनी मज़बूत हुई ये कहानी इस उपन्यास के ज़रिए पाठकों तक पहुँची। वैसे तो दोनों ही उपन्यास पढ़ने लायक हैं और दोनों की कहानी एक ही किरदार की कहानी होते हुए भी, दोनों उपन्यास एक- दूसरे से अपना अलग महत्व रखते हैं। हम तो कहेंगे कि दोनों उपन्यास को पढ़ना ही चाहिए।”

सहज लेखन होने की वजह से आप किताब को पढ़ते चले जाते हैं और कहीं भी बोझ महसूस नहीं होता. सोनल का लेखन उन लोगों के लिए एक प्रेरणास्त्रोत का काम कर सकता है जो लोग परिस्थितियों से भागने रहे हैं. उन्हें इनके लेखन से उत्साह मिल सकता है. हमें लगता है कि ये उपन्यास अंग्रेज़ी साहित्य के शौक़ीन लोगों को पसंद आने वाला है.

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