क्या आप जानते है माता दुर्गा की पूजा में सिंदूर और श्रीफल का महत्व ?

 

नवरात्रि के ये नौ दिन भक्तों के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण होते है। मां दुर्गा की पूजा में नारियल और सिंदूर का विशेष महत्व होता है ।

नारियल को हम संस्कृत भाषा में श्रीफल कहते है श्रीफल के श्री का अर्थ है लक्ष्मी और कहा जाता है की कोई भी कार्य लक्ष्मी जी की कृपा के बिना हो ही नहीं सकता है

श्रीफल का नवदुर्गा के पहले दिन से ही बड़ा महत्व होता है कलश स्थापना के दौरान नारियल को कलश के ऊपर रखा जाता है कलश में पवित्र जल, अनाज आदि रखा जाता है।

वह इसलिए क्योंकि हमारा मन भी जल की तरह हमेशा स्वच्छ बना रहे इसमें लोभ, मोह, घृणा आदि से मुक्ति मिले ध्यान रखें जब भी पूजा में आप नारियल कलश के ऊपर रखें तब उसका मुख साधक की तरफ ही रहना चाहिए।

इस श्री फल को भगवान गणेश जी का प्रतीक भी माना जाता है भगवान श्री गणेश किसी भी शुभ कार्य में प्रथम पूज्य माने जाते हैं पूजा के कलश में जहां नारियल को जगह दी जाती है वहीं दुर्वा, सुपारी, पुष्प भी रखा जाता है।

इसी तरह सिंदूर को भी सोलह श्रृंगार में से एक माना गया है मां दुर्गा की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व होता है यह माँ का श्रृंगार है इस सिंदूर को माँ के श्रृंगार के बाद विवाहित महिलाएं अपनी मांग में धारण करती हैं जिससे उनके सुहाग की रक्षा माता रानी करती है और महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिये मां दुर्गा से प्रार्थना करती हैं।

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