मुस्लि’म ड्राइवर की इस परेशानी को सुनकर हि’न्दू‍ अधिकारी ने शुरू किया रोज़े रखना, अब ले लिया बड़ा फ़ैसला

हमारे मुल्क की अगर सबसे ख़ास बात कहें तो यही है कि हममें प्रेम की भावना है. हमारे देश में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, इत्यादि कई धर्म के मानने वाले लोग हैं और सभी आपस में मिलजुल कर रहते हैं. ऐसा नहीं है कि हमारे देश में कोई समस्या नहीं है लेकिन चाहे राजनीति करने वाले कितना ही नफ़रत फैलाने की कोशिश करें लेकिन वो इसको बहुत दिन तक नहीं कर पाते. हमारे देश की असल पहचान ही मुहब्बत है.

हमारे देश के अलग-अलग हिस्सों से इस तरह की प्यारी बातें आती रहती हैं जिससे इंसान का दिल ख़ुश हो जाए. माना जाता है कि उत्तर प्रदेश में इस तरह की मिसालें बहुत पेश आती हैं और इसी तरह के कई मामलात अलीगढ से भी आते हैं. यहाँ पर हिन्दू मुस्लिम एकता का बेहद खूबसूरत नमूना देखने को मिला है.यहाँ एक उच्च अघिकारी है, वो अपने ड्राइवर के बदले में रोज़े रख रहे हैं.रोज़े रखने वाले इस शख्स का नाम है संजय माली.

संजय माली महाराष्ट्र मंडल के एक वन अधिकारी हैं. उनका ड्राईवर मुस्लिम है जिसका नाम ज़फर है. बात कुछ यूं हुई कि एक रोज़ दोनों कहीं जा रहे थे. बस तभी संजय ने ड्राईवर से सवाल किया कि इस समय तुम लोगों का तो रमजान का पाक महीना शुरू हो गया है. उन्होंने आगे पूछा कि क्या तुम ने रोजा रखा हैं तो जफर ने बडी मायुसी से जवाब दिया क्या कहें साहब मैं रोज़े नहीं रख पा रहा हूँ. एक तो सेहत ठीक नही रहता हैं. ऊपर से से काम ऐसा तो रोज़ा नही हो पाया.

इस बात को सुनने के बाद संजय कुछ सोचने लगे. उन्होंने ज़फर से सवाल किया कि क्या मैं तुम्हारी जगह रोज़े रख सकता हूँ. अब सोच में पड़ने की बारी ज़फर की थी. उन्होंने ज़फर से रोज़े के बारे में सभी नियम पूछे. उन्होंने कहा कि अगर ये मुमकिन है तो मैं तुम्हारे लिए रोज़े रखना चाहता हूँ. ज़फर ने संजय को रमज़ान के सभी अरकान बताये. इस तरह से संजय ने एक महान मिसाल पेश की है.

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