क्या आपको पार्टनर धोखा दे रहा है- जाने अपनी ग्रह दशा से –

पार्टनर मतलब जीवन का साथी वह जीवन साथी भी हो सकता है या व्यवसाय का साथी भी या कार्यक्षेत्र का साथी सभी साथ… साथी को जानने के लिए सप्तम भाव को प्रमुखता से देखा जाता है.. व्यवसाय करना हो या अच्छी दोस्ती … लाइफ पार्टनर हो या बिजनेस पार्टनर शुरू में तो बहुत अच्छा लगता है किंतु कुछ समय के बाद आपस में विवाद, मतभेद दिखाई देने लगते हैं। एक दूसरे के उपर दोषारोपण, धोखा जैसी बातें होने लगती है। इसका कारण ज्योतिषीय विष्लेषण से दिखाई देता हैं किसी भी जातक का सप्तमभाव या सप्तमेष का किसी से भी प्रकार से क्रूर ग्रहों या राहू, शनि या केतु से संबंध होने पर रिश्तों में आपसी मतभेद तथा अविष्वास में कमी का कारण बनता है वहीं वहीं अगर किसी जातक की कुंडली सप्तमेष छठवे, आठवे या बारहवे हो जाए तो ऐसे लोगो के पार्टनरषीप में तालमेल की कमी दिखाई देती है, ऐसी स्थिति सप्तम या सप्तमेष का किसी भी प्रकार का संबंध 6, 8 या 12 वे भाव से बनने पर भी दिखाई देता है।

वहीं पर लग्नेश, पंचमेश, सप्तमेश या द्वादशेष की युक्ति किसी भी प्रकार से शनि के साथ बनने पर विवाद ज्यादा होता है। अतः इन ग्रहों के विपरीत फलकारी होने पर या क्रूर ग्रहों से आक्रांत होने पर सर्वप्रथम इन ग्रहों से संबंधित निदान कराने के उपरांत ही पार्टनरषीप के साथ रिश्ता बनाना चाहिए .. सभी के लिए अलग उपाय उनकी कुंडली से बनते हैं किन्तु सामान्य तौर पर अभिषेक करना, सूक्ष्म जीवो की सेवा करना… दवाई का दान करना और दत्तात्रेय का जाप करना चाहिए…

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