फजिर की सुन्नत और फ़र्ज़ नमाज़ कि अहमियत, अगर मुसलमान जान जाये तो कभी पढ़ना नहीं छोड़ेगा

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों ,आज हम आपको बताएंगे फज़िर की नमाज़ की अहमियत के बारे में। दोस्तों फजिर की नमाज की अपनी एक खास अहमियत है और फजिर के वक्त की फर्ज तो फ़र्ज़ सुन्नतों की भी खास अहमियत है हजरत आयशा फरमाती है कि मैने प्यारे नबी को किसी भी वक्त की नफिल नमाज के लिए इतनी जल्दी करते हुए नहीं देखा जितनी कि वह फज़िर नमाज़ के पहले 2 रिकात नमाज़ पढ़ने के लिए करते थे।यहाँ जल्दी से मुराद है कि उसकी अदायगी के लिए आप फिक्र करते थे.

हजरत आयशा कहती है कि हमारे प्यारे नबी ने कहा है कि फज़िर की नमाज़ (यानी कि 2 रकात फर्ज )को पढ़ना मेरे लिए हर नमाज से ज्यादा महबूब है। आपने फरमाया कि जो इंसान इशा और फजिर की नमाज में आ सकता है उस पर हुक्म है कि वह आए ,भले ही उसे घुटनों के बल या पीठ के बल पर घसीट घसीट कर आना पड़े तो भी वह आए। ऐसा इसलिए कहा गया है कि जो इंसान फजिर की नमाज पढ़ता है वह अल्लाह की हिफाजत में आ जाता है.

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आप रसूल अल्लाह ने फरमाया है कि जिस ने सुबह की नमाज पढ़ी वह अल्लाह की हिफाजत में आ गया इससे यह पता चलता है कि जो इंसान फज़िर की नमाज पढ़ता है वह अल्लाह के करीब आ जाता है और अल्लाह की हिफाजत में आ जाता है ।तब कोई ऐसा नहीं हो सकता जो उस पर जुल्म करे। अगर कोई इंसान किसी ऐसे इंसान पर जुल्म करता है जो फजिर की नमाज पढ़ता हो तो यह अल्लाह की नमाज में खयानत होगी जिसे अल्लाह ने अपने जिम्मे पर लिया है और फिर कयामत में अल्लाह ऐसे शख्स को पकड़ेगा यानी कि फजिर पढ़ने वाले इंसान की इज्जत और हिफाज़त हर किसी पर लाजिम है क्योंकि सिर्फ मोमिन ही है जो सभी नमाज़ों के साथ फज़िर की नमाज की पाबंदी करता है.
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बहुत से लोगों के लिए फज्र की नमाज़ बहुत भारी होती है वो एक खास वक्त से पहले नहीं उठते हैं। कुछ लोगों की तो फजिर अक्सर कजा हो जाती है ऐसे लोग क्योंकि देर से सोते हैं इसलिए सुबह देर से ही उठते हैं ।ऐसे लोगों की हिफाजत अल्लाह के जिम्मे नहीं है इसलिए हम सब को खासतौर पर फिक्र करनी चाहिए कि हमारी फज्र क़ज़ा ना हो.

क्योंकि बाकी नमाज के वक्त में तो हम जागते ही रहते हैं और अजान भी हमें सुनाई देती है और दूसरों को भी अगर हम पढ़ते देखते हैं तो भी हम पढ़ लेते हैं कि चलो भाई हम भी पढ़ ले लेकिन फज्र की नमाज़ में उठना एक जिम्मेदारी होती है क्योंकि उस वक्त हम गहरी नींद में होते हैं। फजिर पढ़ने वाला इंसान शाम तक अल्लाह की हिफाजत में होता है.

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