इन स्थानों पर बिल्कुल नहीं रहती हैं देवी लक्ष्मी, कहीं अपने घर में आप भी तो नहीं कर रहे ऐसा

नई दिल्लीः Devi Laxmi: पुराणों में वर्णित है कि देवी लक्ष्मी धन की देवी हैं. बिना उनके सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति नहीं होती है. इन दिनों महालक्ष्मी व्रत का समय चल रहा है. ऐसे में उनकी हृदय से आराधना करके देवी लक्ष्मी की कृपा पाई जा सकती है, लेकिन ध्यान रखिए कि देवी लक्ष्मी का एक नाम चंचला भी है.

यानी वह एक ही घर में हमेशा नहीं ठहरती हैं. कुछ भी गलत हुआ तो वह उस स्थान पर से चली जाती है. किन लोगों पर नहीं बरसाती हैं देवी लक्ष्मी कृपा, जानिए यहां.

महाभारत में है वर्णन

शास्त्रों में देवराज इंद्र और महालक्ष्मी संवाद का वर्णन किया गया है. इसमें देवी लक्ष्मी ने बताया है कि वह किन लोगों पर प्रसन्न होकर कृपा करती हैं. महाभारत के शांति पर्व मे दिए गए प्रसंग के अनुसार एक समय जब देवी लक्ष्मी असुरों का साथ छोड़कर देवराज इंद्र के यहां निवास करने के लिए पहुंची थीं. तब इंद्र ने लक्ष्मी से पूछा था कि किन कारणों से आपने दैत्यों का साथ छोड़ दिया है ? इस प्रश्न के उत्तर मे लक्ष्मी ने देवताओं के उत्थान तथा दानवों के पतन के कारण बताए थे.

ये लोग बनते हैं कृपा पात्र

लक्ष्मीजी ने बताया जो लोग व्रत उपवास करते हैं. प्रतिदिन सूर्योदय से पूर्व बिस्तर का त्याग कर देते हैं. रात को सोते समय दही का सेवन नहीं करते हैं. सुबह-सुबह घी और पवित्र वस्तुओं का दर्शन किया करते हैं. दिन के समय कभी सोते नहीं हैं. इस सभी बातों का ध्यान रखने वाले लोगों के यहां लक्ष्मी सदैव निवास करती हैं.

दानशील लोगों के घर में लक्ष्मी का आवास

पूर्व काल मे सभी दानव भी इन नियमों का पालन करते थे. इस कारण मैं उनके यहां निवास कर रही थी. अब सभी दानव अधर्मी हो गए हैं. इस कारण मैंने उनका त्याग कर दिया है. आगे महालक्ष्मी ने इंद्र को बताया कि जो पुरुष दानशील, बुद्धिमान भक्त, सत्यवादी होते हैं, उनके घर में मेरा वास होता है. जो लोग ऐसे कर्म नहीं करते हैं. मैं उनके यहां निवास नहीं करती हूं.

जहां, पितरों का तर्पण हो वहां रहती हैं देवी

इंद्र के पूछने पर महालक्ष्मी ने कहा कि जो लोग धर्म का आचरण नहीं करते हैं. जो लोग पितरों का तर्पण नहीं करते हैं. जो लोग दान-पुण्य नहीं करते हैं. उनके यहां मेरा निवास नहीं होता है. महाभारत मे महालक्ष्मी ने बताया है कि जहां मूर्खों का आदर होता है. वहां उनका निवास नहीं होता. जिन घरों मे व्यक्ति दुराचारी यानी बुरे चरित्र वाले हो. जहां लोग उचित ढंग से उठने बैठने के नियम नहीं अपनाते हैं. जहां सा- सफाई नहीं रखी जाती हैं. वहां लक्ष्मी का निवास नहीं होता है.

शूरवीर लोगों से प्रसन्न रहती हैं लक्ष्मी

देवी लक्ष्मी ने बताया कि वह स्वयं धनलक्ष्मी, भूति, श्री, श्रद्धा, मेधा, संनति, विजिति, स्थिति, धृति, सिद्धि, समृद्धि, स्वाहा, स्वधा, नियति तथा स्मृति हैं. धर्मशील पुरुषों के देश में, नगर में, घर में सदैव निवास करती हैं. लक्ष्मी उन्हीं लोगों पर कृपा बरसाती हैं जो युद्ध मे पीठ दिखाकर नहीं भागते हैं. शत्रुओं को बाहुबल से पराजित कर देते हैं. शूरवीर लोगों से लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहती हैं.

रसोई में हो पवित्रता तो रहती हैं लक्ष्मी

जिन घरों मे खाना बनाते समय पवित्रता का ध्यान नहीं रखा जाता है. जहां जूठे हाथों से ही घी को छू लिया जाता है. वहां मैं निवास नहीं करती हूं. लक्ष्मीजी ने बताया जिन घरों में लोग अपने वृद्ध पर, नौकरों के समान हुकुम चलाते हैं. उन्हें कष्ट देते हैं. अनादर करते हैं मैं उन घरों का त्याग कर देती हूं. यह स्त्रियां भी करें तो तो मैं सारे सौभाग्य के साथ वहां से चली जाती हूं.

द्वेष रखने वालों के पास नहीं रहती देवी

जिस घर मे पति पत्नी को पत्नी अपने पति को प्रताड़ित करती है. कलहप्रिया होती है. पति की आज्ञा का पालन नहीं करती है. मैं उन घरों का त्याग कर देती हूं. जो लोग अपने शुभ चिंतकों के नुकसान पर हंसते हैं. उनसे मन ही मन द्वेष भाव रखते हैं. किसी को मित्र बनाकर उसका अहित करते हैं तो मैं उन पर लोगों कृपा नहीं बरसाती हूं. ऐसे लोग सदैव दरिद्र रहते हैं.

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