औरत और मर्द पर गुस्ल कब-कब फर्ज़ होता है? हर मुसलमान के लिए ये बात जानना है ज़रूरी…

एक भाई ने मुझसे सवाल किया हैं कि इस्तीनजा कर के उठने पर अगर कतरे निकल गए हैं तो क्या उस सूरत में ग़ुस्ल फ़र्ज़ है?अगर नह है तो क्या कमर से घुटने तक धोना सही है?क्या हम पाक हो जायँगे और क्या हम नमाज़ पढ़ सकते ह?क्या कभी सफर में कोई मजबूरी हो और खड़े हो कर पेशाब करने पड़े तो क्या नमाज़ हो जायेगी?क्या सोहबत के बाद ग़ुस्ल फ़र्ज़ है?इन सभी सवालों के बारे मे जानना चाहता हूं.

मैं जवाब देना चाहता हूँ सबसे पहले की पेशाब के कतरे हो जाने से ग़ुस्ल फ़र्ज़ है या नहीं….तो मेरे भाई मै आपको बता देता हूं कि कतरे गिर जाने से और कपड़े में लग जाने से ग़ुस्ल फ़र्ज़ नहीं है और पूरा कपड़ा नापाक नही होगा।और मै ये भी बता दु की बहुत से लोग सोचते है कि अगर पेशाब करने के बाद अगर इस्तीनजा न करे तो हम नापाक हो जाते हैं लेकिन ऐसा नहीं है उस पर ग़ुस्ल फ़र्ज़ नही है.

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जितने कपड़े पर पेशाब के कतरे गिरे हैं उतने कपड़े को धोने से इंसान पाक ही रहेगा।औऱ रही बात मनी या गलिज़ा के निकलने की तो ये डिपेंड करता है कि मनी किस हालात में निकली है अगर बेहोशी की हालत मे निकली हो।या अचानक से कभी निकल जय तो ग़ुस्ल फ़र्ज़ नही है लेकिन अगर ये कतरा या मनी एक दिरहम से ज़्यादा है तो नमाज़ नहीं हो सकती है.

दिरहम से मुराद ये है कि हथेली का बीच का हिस्सा जिसमे थोड़ा पानी ठहर सके और जब तक हथेली सीधी है पानी गिर न सके उतनी गोलाई नाप को एक दिरहम कहते हैं।तो अगर किसी के कपड़े पर इससे ज़्यादा का पेशाब या मनी लग जाय तो उसको धोना फ़र्ज़ हैं जब तक उस जगह को धो नह दिया जायेगा वो नामाज़ भी नही पढ़ सकता है उसे धोय बगैर.

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अगर एक दिरहम के बराबर गन्दगी हो या उससे ज़्यादा हो तब उसे धोना वाजिब हो जायेगा।अगर उस जगह को धो दिया जाय तो उस सूरत में पढ़ी गई नमाज़ वाजिबुल अदा होगी और अगर थोड़ा भी शक हो कि गंदगी एक दिरहम से ज़्यादा ह ओर उसे धोया न जाय तब उस हालत में पढ़ी गई नमाज़ नहीं मानी जायेगी।और आपको फिर से पाकी हसिक करने के बाद नमाज़ पढ़नी होगी.

अगर गन्दगी एक दिरहम से कम हो तब नमाज़ तो हो जायेगी लेकिन उसका दोहराना सुन्नत होगा, अगर मनी सोहबत से निकले तब ग़ुस्ल वाजिब हो जायेगा ।अगर मजबूरी में कोई खड़े हो कर पेशाब करता हैं और बारीक बारीक छीटे पड़ जाय तब ग़ुस्ल वाजिब नही है और आपकी नमाज़ हो जायेगी।ध्यान रहे अगर पेशाब की बूंदे सुई की नोख से महीन है तो ग़ुस्ल वाजिब नहीं होगा।और नमाज़ हो जायेगी.

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