मौलाना सय्यद अमिनुल कादरी ने बताया- हुज़ूर ने एक सहाबी का रिश्ता लगाया और उसके बाद…

अस्सलामोअलैकुम नाज़रीन भाइयो और बहनों अल्लाह ताला ने आपको 1 मुबारक सफर के लिए कुबूल फरमाया है। जैसे अल्लाह ताला ने कहा है हमे वैसे करना है और जो हमारे पैगम्बर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने करके दिखाया है हमे वह करना है। वही इबादत है और हमे उन्ही के रास्ते पर चलना है. आज हम आपको हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का 1 वाकया बताते हैं 1 दिन हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दोपहर के समय अपनी बारगाह में अकेले बैठे थे तभी हज़रत असवत हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बारगाह में दाखिल हुए तो हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने उनसे मज़ाक में कहा अए असवत तू तू इतना बड़ा हो गया है तू शादी क्यों नहीं करता है.

ये सुनकर अस्वत की आंखों में आंसू आ गये उसे रोता देखा तो पूछा तू क्यों रोता है तो उसने कहा आका आप कहरहे इतना बड़ा हो गया शादी क्यो नही करता। मेरे जैसे गहरे रंग के आदमी को बेटी कौन देगा यहां के लोग तो बहुत खूबसूरत हैं। अंसारे मदीना तो हसीन और जमील है मुझे क्यों बेटी देगा? बस इतना कहना था हुज़ूर की बारगाह में कोई बात कह दी जाय और वह पूरी न हो बस इतना कहना था हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा जाओ जो मदीना का सबसे खूबसूरत घराना होगा जाकर कहना कि मैंने भेजा है अपनी बेटी का रिश्ता वो तुम्हारे साथ तय करदेंगे और जब रिश्ता तय हो जाय तो मैं तुम्हारा निकाह पढ़ाउंगा.

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अस्वत गए दरवाज़े पर दस्तक दी आवाज़ आई कौन उन्होंने कहा मैं अस्वत तभी घर के ज़िम्मेदार आदमी ने दरवाज़ा खोला पूछा अस्वत सब खैर तो है कहा मुझे अल्लाह के रसूल ने भेजा है रिश्ता लेकर। उन्होंने समझा अपने लिये रिश्ता मांगा है वह बहुत खुश हुए जब पूछा किसके लिए?तो बोला मेरे लिए ये सुनकर वो बहुत परेशान हुए 1 हब्शी पक्के रंग का आदमी और गुलाम उसकी बेटी बहुत खूबसूरत है वो अपनी बेटी को कैसे मनाएगे लेकिन हुज़ूरे पाक ने कहा है 1 तरफ बेटी की ज़िंदगी है दूसरी तरफ हुज़ूर पाक का हुक्म और ईमान का मामला है.

अभी वह सोच ही रहे थे तभी उनकी बेटी पीछे से बोली बाबा तुरन्त जवाब देदे देर न करे आने वाले को न देखे जिसने भेजा है उसकी सोचे। किसी का रिश्ता माँ, बाप, भाई, बहन लाते है पर आपकी बेटी का रिश्ता हमारे आका सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने भेजा है, देर न करे तुरन्त हाँ कर दे। आने को ना देखें भेजने वाले महबूब ए खुदा को देखिए। जब उन्होंने हां कर दिया अस्वत फूले नहीं समा रहे थे दौड़े-दौड़े हुज़ूर के पास आये और कहा उन्होंने हां कर दिया.

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हुजूर ने 1 चटाई और कुछ पैसे रखे थे जिसे अस्वत को दिया और कहा जाओ इससे कपड़े खरीदना और शादी का इंतजाम करो ताकि तुम्हारा निकाह हो सके इधर वह बाज़ार गए उधर किसी ने आकर खबर दी या रसूलअल्लाह उहद के मैदान में दुश्मन आकर इकट्ठा हो गये है और जंग शरू होगई है। सरकार ने कहा ऐलान करदो ऐलान करते करते बाज़ार में पहुंच गया और कहा लोगो काम काज छोड़ो हुज़ूर के पास जाओ। अस्वत ने जब ये बात सुनी तो दुकानदार को सामान वापस कर पैसे ले लिये और उससे ढाल और तलवार खरीद जंग के मैदान में जाखडे हो गये और हुज़ूर की राह में इससे बेहतर कोई तोहफा न होगा.

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