इस दुआ को लगातार 7 दिन तक पढ़ने से अल्लाह रसूल सारे गुनाह माफ़ कर देते हैं

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, आज हम आपके लिए लाएं हैं एक ऐसी दुआ जिसे आप अगर 7 दिन तक लगातार पढेंगे तो अल्लाह आपके सारे गुनाह माफ कर देगा। दोस्तों यह बात बिल्कुल सही है कि गुना और गलती हर इंसान से होता है और हर इंसान को अपनी जिंदगी में कभी ना कभी उसके किए गए गुनाहों का एहसास होता है ।जिस वक्त उसे अपने गुनाहों का एहसास होता है उस वक्त वह इंसान अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहता है.

दोस्तों यह बात भी बिल्कुल सही है कि गुनाह चाहे कितना भी बड़ा हो भले ही वह ज़िना के बराबर ही क्यों ना हो अल्लाह माफी मांगने पर बंदे को माफ कर देता है लेकिन फर्क बस इतना सा है कि जब कोई बंदा अपने गुनाहों की माफी मांगे तो वह अपने दिल से रो रो कर अपने गुनाहों की माफी मांगे उसे इस बात का एहसास हो कि उसने जो किया वह गलत किया. दोस्तों आज हम आपके उन्ही गुनाहों की माफी के लिए एक ऐसी दुआ लेकर आए हैं जिसे आप 7 दिन लगातार पढ़कर अल्लाह से अपने गुनाहों को माफ करवा सकते हैं लेकिन यह दुआ उन लोगों के लिए है जो सच में तौबा करना चाहते हैं और सच्चे दिल से यह ठान चुके हैं कि आगे से वह यह भूलकर भी नहीं करेंगे और तमाम गुनाहों से बचने की कोशिश करेंगे.

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मेरे प्यारे भाइयों और बहनों आप सभी कोशिश करें इस दुआ को सच्चे दिल से पढ़े । क्योंकि सच्चे दिल से अगर कोई माफी मांगता है और दुआ मांगता है तो अल्लाह उसे सब कुछ देता है। दोस्तों सच्ची तौबा का मतलब यह होता है कि माफी मांगने वाला बंदा अपने गुनाहों से माफी मांगता है और आगे से वह उस गुनाह को ना करने का वादा करता है। दोस्तों सच्ची तौबा करने की 3 शर्ते हैं.

सबसे पहला तो यह कि आपको ऐसा होना चाहिए कि आपने जो किया वह सच में गुनाह है दूसरा ये है सच्चे दिल से तौबा करना और तीसरा है उस गुना और गलती को दोबारा ना दोहराना। मेरे भाइयों अगर आपको लगता है कि आप से कोई गुनाह हुआ है या आपने किसी दूसरे इंसान के साथ ज्यादती की है तो अल्लाह से तौबा करने के बाद आपको उस इंसान से भी माफी मांगनी चाहिए जिसके साथ आप ने बदसलूकी की हो या ज़्यादती की हो। दोस्तों यह दुआ आपको आपके गुनाहों से माफी ज़रूर दिलाएगी और आपसे होने वाले गुनाहों से भी बचाएगी.

दोस्तों इस दुआ को आपको जुम्मे के दिन से शुरू करना है सबसे पहले आपको वजू करना है फिर 7 मर्तबा दरूद शरीफ पढ़ना है फिर अल्लाह का यह नाम “अल गफ्फार “21 मर्तबा पढ़ें। दोस्तों गफ्फार का मतलब होता है गुनाहों को माफ करने वाला उसके बाद आपको यह दुआ पढ़ना है, अस्तग़फ़िरुल्लाहिल लाज़ि लाइलाहा इल्ला हुवअल हय्यूल काय्युमो व तुबो इलैहि. इस दुआ को पढ़ने के बाद आपको 7 मर्तबा फिर तो दरूद शरीफ पढ़नीे है. दोस्तों बस इस बात का आप ख्याल रखियेगा की इस दुआ को पढ़ने का वक्त और जगह एक ही होनी चाहिए.

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