जयंत चौधरी के इस बयान से कांग्रेस और भाजपा को लगा झटका, सपा-बसपा के साथ या…

हेलो दोस्तो 2019 के चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है। ऐसे में सियासी गरमा गरमी बढ़ती ही जा रही है ।अगर बात करें आरएलंडी की तो RLD ने अभी तक अपने सभी पत्ते खोले नहीं है। जयंत चौधरी लगातार कांग्रेस और अखिलेश यादव के संपर्क में बने हुए हैं. कांग्रेस चाहती है कि जयंत चौधरी उनसे मिल जाए और अखिलेश यादव चाहते हैं जयंत चौधरी महागठबंधन में शामिल हो जाए ऐसे में जयंत चौधरी का फैसला क्या होगा यह जानना काफी रोमांचक होगा। अभी जल्दी ही सूत्रों से पता चला है कि जयंत चौधरी ने अपने एक बयान में यह साफ कर दिया है किउनकी कांग्रेस के कोई बातचीत नहीं हुई है.

जयंत चौधरी ने डायरेक्ट यह नहीं बताया है कि वह महागठबंधन के साथ जा रहे हैं लेकिन उन्होंने महागठबंधन से जुड़ने के संकेत दिए हैं, दरअसल आरएलडी गठबंधन से 4 सीटे चाहती है. पार्टी द्वारा जारी किए गए एक पत्र में लिखा है कि महागठबंधन से जुड़कर ही जनता की उम्मीदों को पूरा किया जा सकता है. दोस्तों उम्मीद लगाई जा रही है इस चुनाव में लोक दल को भारी मतों से विजय हासिल हो सकती है.

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तो दोस्तों सपा बसपा गठबंधन के बाद राष्ट्रीय लोक दल की बात भी समाजवादी पार्टी से बन गई है आरएलडी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने इसी मुद्दे पर बात करने के लिए अखिलेश यादव से मुलाकात भी की ।उन्होंने यह भी कहा कि हमारे लिए सीटें नहीं संबंध ज्यादा मायने रखते हैं. आपको बता दें कि उम्मीद की जा रही है कि अखिलेश यादव अपने कोटे से उन्हें 2 सीटें देंगे.
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दोस्तों जिस समय आरएलडी और सपा बसपा गठबंधन से बात नहीं बन रही थी उस समय मुद्दा यह था कि सपा बसपा में 50-50 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात तय हुई थी और यह भी कहा गया था कि यदि कोई छोटा दल आपसे मिलता है तो आपको अपनी सीटों में से ही कुछ सीटें उस दल को देनी पड़ेगी जिसके लिए केवल 2 सीटें छोड़ी गई थी। माना जा रहा था कि यह 2 सीटें आरएलडी के लिए छोड़ी गई थी लेकिन आरएलडी ने 6 सीटों की डिमांड रखी थी इसी खींचतान में समझ नहीं आ रहा था कि आरएलडी कांग्रेस के साथ जाएगी या महागठबंधन के साथ आयंगे.
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सूत्रों से पता चला है कि अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच हुई मुलाकात में यह तय हुआ है की आरएंलडी को 4 सीटें दी जाएंगी ।इन चारों में से एक है बागपत जो कि उनकी विरासत की सीट है जिसे उन्हें बचाना ही होगा, दूसरी में मुजफ्फरनगर, तीसरी है मथुरा की ,और आखरी में जो है वो है हाथरस।

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