जब कोई मु’सी’बत आये तो उस वक़्त ये दुआ ज़रूर पढ़े, इंशा-अल्लाह मु’सी’बत तुरंत…

अस्सलामोअलैकुम नाज़रीन भाइयों और बहनों जब हम पर कोई मुसी’बत आए हमें अल्लाह ताला को याद करना चाहिए और 2 रकात नमाज नफिल सलातुल हाजत पढ़कर दुआ मांगना चाहिए। लोग मुसीबत के वक्त ताबीज़,जादु, गंडो मे फंस जाते है और मौलवी मौलाना के पास जाते हैं तमाम तरह के उनसे अमल करवाते हैं तो मेरे दोस्तों इस अमल से बचें और अल्लाह ताला से अपनी मुश्किल का हल तलब करें, अल्लाह हर मुश्किल को आसान करने वाला है.

एक वाक्या- जब यूनुस अलैहिस्सलाम समुंदर के अंदर मछली के पेट में चले गए इससे बड़ी कोई मुसीबत होसकती है तो उन्होंने ताबीज नहीं बांधा उन्होंने अल्लाह ताला से दुआ की, “ला इलाहा इल्ला अंता सुब्हानक इन्नी कुन्तम मिनज़्ज़ालिमीन”। या अल्लाह तमाम तारीफ आपके लिए आप हर ऐब से पाक हैं मैं आपसे माफी मांगता हूं कि मैं कौम को छोड़कर चला आया.

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अल्लाह ताला ने उन्हें माफ करदिया और इस मुश्किल से निजात दिला दी।इंसान की हर ख्वाहिश दुनिया मे पूरी नही होती।जो इंसान के हक़ में बेहतर होता है। अल्लाह वही पूरा करता है।जब कोई मुसीबत आए अस्तग़फ़ार करे अल्लाह से दुआ करे अल्लाह ताला मुश्किल को आसान करेंगे.

जब किसी पर कोई मुसीबत आए तो मुसीबत के समय ये दुआ पढ़नी चाहिए. “इनना लिल्लाही व इनना इलैहि राजिऊन”। तर्जुमा- हम सब ( माल व औलाद हकीकत में) अल्लाह ताला की ही मिल्कियत है और (म-रने के बाद) हम सब को उसी के पास लौट कर जाना है.

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हदीस- हज़रत अबूबक्र(रज़ि)से रिवायत है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: जो शख्स मुसीबत में हो वह ये दुआ पढ़े।”ऐ अल्लाह मैं आपकी रहमत की चाहता हूँ मुझे पलक झपकने के बराबर भी मुझे मेरे नफ़्स के हवाले न कीजिये। मेरे तमाम हालात को ठीक कर दीजिये आपके सिवा कोई माबूद नही”.

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