जो लोग सुबह के वक़्त देर तक सोते हैं वो इसका नुक्सान जान ले, डॉक्टर फरहत हाश्मी साहब ने बताया…

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हर बदलते वक्त के साथ अल्लाह की तस्बीह करना चाहिए, हम सुबह के समय सो जाते हैं। हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास ने सुबह के वक्त सोने को ना पसंद करार दिया है जब सूरज अंदर बाहर हो तो नहीं सोना चाहिए अपने बेटे को खासतौर पर इससे बचने की ताकीद करते और कहा करते दोपहर की सिवा दिन के किसी और हिस्से में सोना नहीं चाहिए। हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं दोपहर का खाना खा कर आराम करने को कहा गया है खाना खांय या न खांय थोड़ी देर के लिए जरूर आंखें बंद करके आराम करें दिन के बाकी हिस्सों को काम करने का कहा गया है.

खाना खाकर तुरंत सोने के लिए मना किया है क्योंकि यह दिल में सख्ती पैदा करता है। खाना खाने के बाद इंसान तुरंत सो जाए तो दिल की बीमारी पैदा होती है। हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने रूहानी तौर पर भी दिल के सख्त होने की बात फरमाई है। बदलते लम्हों में अल्लाह का जिक्र करो सूरज निकलने से पहले नमाज पढ़ो सूरज निकल जाता है दोपहर में फिर नमाज पढ़ो असर के वक्त जब सूरज ढलता है तो फिर नमाज पढ़ो फिर मगरिब हो जाए फिर नमाज पढ़ो फिर अंधेरा हो जाए फिर नमाज पढ़ो एक ही वक्त में सारी नमाजे नहीं है इससे आदमी बोर हो जाता है.

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वक्त की तब्दीली के साथ-साथ अल्लाह को याद रखना जारी रखो किसी भी वक्त उसको भूलो नहीं अल्लाह को हमेशा याद रखना चाहिए,तुम अल्लाह को याद करोगे अल्लाह तुमको याद करेगा। हर चीज बदल जाती है अल्लाह की याद में अल्लाह की याद नहीं बदलती वह अपनी जगह कायम है। खासतौर से असर और मगरिब का वक्त अल्लाह की इबादत करना चाहिए ना कि सोना चाहिए इससे आदमी में 100 तरह की बीमारियां होती है डिप्रेशन पैदा हो जाता है वक्त बदले जब कैलेंडर बदले जब साल बदले अल्लाह को याद करो सिर्फ अल्लाह को याद करो जब कोई भी काम अल्लाह ताला के हिसाब से किया जाता है तो इंसान और एनर्जेटिक हो जाता जाता है जिंदगी खुशहाल हो जाती है.

बे वक़्त सोना बहुत नुकसानदे है इसकी एक वजह यह भी है कि सूरज से जो रेज़ निकलती हैं उनका हमारे शरीर पर पड़ना बहुत जरूरी होता है जिससे हमारे जिस्म के अंदर कुछ ऐसे चेंज होते हैं उनके पड़ने से हमारा शरीर रिस्पॉन्ड करता है और इससे बहुत सारी बीमारियों से निजात मिलती है इसलिए भी सुबह का सोना बहुत नुकसान दे हैं और हमें सुबह उठना चाहिए और अल्लाह की इबादत करना चाहिए जब सबके उठने का वक्त होता है परिंदे चहचहाते हैं इंसान रोज़ी की तलाश में निकल जाता है हर कोई अल्लाह की हम्दो सना करता है अल्लाह ताला रोज़ी बाटते है उस समय हम सोते रहते हैं तो इंसान के ऊपर एक नहूसत तारी होती है.

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नबी क्रीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सुबह के वक्त जागने वालों के लिए बरकत की दुआ की है आपने फरमाया,”अल्लाहुम्मा बारिक ली उम्मती फि बुकुरिहा”। ऐ अल्लाह मेरी उम्मत के कदमो में बरकत पैदा कर दे। आप अपना टाइमटेबल इस हिसाब से बनाइये की सुबह का वक़्त अच्छे-अच्छे कामों में गुजरे बहुत से लोग कोर्स करना चाहते हैं लेकिन वह इसलिए मजबूर है कि सुबह में उठ नहीं सकेंगे तो आएंगे कैसे? क-ब्र में जाकर सोना ही है कोई और काम नहीं है वहाँ फिर सोते रहिएगा मौ-त नींद की बहन है मौ-त से मिलती-जुलती चीज है नींद बहुत प्यारी है.

हम अपने आप को हमेशा यही कहते हैं कि मर कर तो सोना ही सोना है अभी तो अल्लाह ताला ने वक़्त दिया है तो अभी तो उठ सकते हो तो उठ जाओ और जो अच्छे अच्छे काम है उसे कर लो फिर तो सोना ही सोना है कुछ कर लो अभी यह करने का वक़्त है जब यह वक़्त खत्म हो जाएगा कुछ ना कर सकेंगे अगर अल्लाह के लिए आप एक साल ना बेवक़्त सोयें और दिल की ना माने तो कोई बहुत बड़ा नुकसान नहीं है आपकी सेहत आपकी मसरूफियत आपका सब कुछ बदल जाएगा आप बेहतर खुशी महसूस करेंगे.

सोकर वक्ती तौर पर नफ़्स की ख्वाहिश तो पूरी हो जाती है लेकिन उसके बाद जो डिप्रेशन आता है जो फ़िक्र और गम आते हैं वह इंसान फेस नहीं कर सकता उसके नतीजे में कमजोर होता चला जाता है और उनका इलाज हम फिर दवाइयों में ढूंढते हैं। मेरे भाइयों और बहनों हम आप से गुजारिश करते हैं कि सुबह का समय सोने में ना गुजारे सुबह के वक्त अल्लाह की हमदोसना करें और अच्छे-अच्छे काम किया करें जिससे आपके रिज़्क में बरकत भी होगी और आपका दिन अच्छे से गुजरेगा। अल्लाह ताला हम सब को भी हिदायत दे और अमल करने की तौफीक अता फरमाऐ आमीन.

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