क्या आपको प’ता है सऊदी अरब में नहीं है एक बे’हद ज़रूरी ची’ज़, इसलिए ऐसे..

अरब क्षेत्र के सबसे महतवपूर्ण देशों में से एक सऊदी अरब की सबसे बड़ी स’मस्या ये है कि सऊदी अरब में पानी नहीं है. पीने के पानी की स’मस्या से जूझ रहे सऊदी अरब में सरकार इस ओर विशेष काम कर रही है. सरकार देश में कोई नदी न होने की वजह से इस कोशिश में है कि समंदर के पानी को पीने लायक़ बनाया जाए. ऐसा किया भी जा रहा है जिसमें काफी पैसा ख़र्च हो रहा है.

इसको लेकर समझने की ज़रूरत ये भी है कि सऊदी अरब में तेल के बड़े-बड़े कुँए हैं लेकिन पानी के कुँए जो थे सब सूख गए हैं. सऊदी अरब की इस परेशानी के बारे में बीबीसी ने एक रिपोर्ट छापी है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सन 2011 में सऊदी अरब के उस समय के पानी और बिजली मंत्री ने कहा था कि देश में पानी की माँग हर साल सात प्रतिशत की दर से बढ़ रही है.

उन्होंने कहा था कि अगले एक दशक में इसके ऊपर 133 अरब डॉलर का ख़र्च आएगा. सऊदी अरब सालीन (खारा) वाटर कन्वर्जन कॉर्प (एसडब्ल्यूसीसी) हर रोज़ 30.36 लाख क्यूबिक मीटर समंदर के पानी को नमक से अलग कर इसे पीने लायक़ बनाता है. पानी की समस्या दिन ब दिन बढ़ रही है और ऐसे में सऊदी सरकार को इसके लिए विशेष क़दम उठाने ज़रूरी हैं.

बीबीसी ने कहा है कि कई रिसर्च मानती हैं कि सऊदी अरब में भूमिगत जल 11 साल में समाप्त हो जाएगा. सऊदी अरब में प्रति व्यक्ति पानी की खपत हर दिन 265 लीटर बतायी जाती है जोकि यूरोपीय यूनियन के देशों से दुगनी है. आपको बता दें कि सऊदी अरब में कोई भी नदी नहीं है और न ही कोई झील है. लम्बे समय से लोग यहाँ पानी के लिए कुओं पर निर्भर हैं. वक़्त के साथ पानी की ज़रूरत बढ़ी लेकिन कुओं का लेवल नीचे जाता गया. स्थिति यहाँ तक आ गयी कि अब कुँए सूखने लगे.

देश में बारिश भी कम ही होती है, मौसम में भी बस एक दो दिन माहौल बनता है. 2010 में विकिलीक्स केबल ने ये भी दावा किया है कि सऊदी अरब के किंग अब्दुल्ला ने भोजन बेचने वाली कम्पनियों को विदेशों में ज़मीन खरीदने के लिए कहा जिससे कि वहाँ से पानी मिल सके. विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब अभी अपनी GDP का 2% तक पानी की सब्सिडी पर ख़र्च करता है. मिडिल-ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका में पानी का भयंकर संकट है. ये क्षेत्र दुनिया का सबसे ख़तरनाक सूखाग्रस्त क्षेत्र है.

(साभार- भारत दुनिया)

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