भाजपा के बड़े नेता ने वरुण गाँधी को लेकर किया बड़ा खुलासा, लोकसभा चुनाव में…

हेलो दोस्तों लोकसभा सीटों की श्रृंखला में अब बात हो रही है सुल्तानपुर की, यह वह सीट है जिस पर अमेठी और सुल्तानपुर एक हुआ करता था लेहाज़ा इसको भी गांधी परिवार की परंपरागत सीट कहा जा सकता है और यहां से संजय गांधी और मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी सांसद है। 2014 के चुनाव में वरुण गांधी बीजेपी के कैंडिडेट थे और यहां से वह जीते भी थे लेकिन इस बार वरुण गांधी सुल्तानपुर से चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह बात अभी तक निश्चित नहीं हो पाई है क्योंकि बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से उनकी तल्ख़ियां है ।क्या बीजेपी इस बार भी उन्हें टिकट देगी या किसी और को टिकट देगी? आइए आपको बताते हैं इन सवालों के जवाब.

दोस्तों सूत्रों की मानें तो बीजेपी एक ऐसे कैंडिडेट की तलाश में है जो सुल्तानपुर से ही हो और जिताऊ भी हो और उसकी अपनी बिरादरी में भी मजबूत पकड़ हो हालांकि बीजेपी के नेता अभी इस मुद्दे पर कुछ कहना नहीं चाहते हैं। बीजेपी के एक बड़े नेता ने कैमरे के सामने तो कुछ भी कहने से मना कर दिया लेकिन ऑफ कैमरा उन्होंने यह कहा है कि यह तो तय है कि वरुण गांधी इस बार यहां से चुनाव नहीं लड़ेंगे.

google

दरअसल वरुण गांधी पिछले कुछ दिनों से जब से बीजेपी का इलाहाबाद में अधिवेशन हुआ था उसमे वरुण गांधी के होर्डिंग्स लगे हुए थे मुख्यमंत्री पद के लिए ,उस वजह से केंद्रीय नेतृत्व की नाराजगी वरुण गांधी से बढ़ गई और फिर धीरे धीरे वरुण गांधी बीजेपी से दूर होते चले गए.

यह बात तो तय है कि सुल्तानपुर से वरुण गांधी चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन जब यह सवाल पूछा गया कि वरुण गांधी की जगह पर कौन चुनाव लड़ेगा तो इस बात पर हर कोई चुप्पी साधे हुए हैं सबका कहना है कि अभी तक कोई नाम तय नहीं हो पाया है हम वरुण गांधी की जगह लेने वाले को तलाश रहे हैं.

google

सूत्रों से पता चला है कि वरुण गांधी की पीलीभीत से चुनाव लड़ने की संभावनाएं हैं। बीजेपी के नेताओं का कहना है कि यह राजनीति है यहां पर कुछ भी पहले से तय नहीं होता है जब तक प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं हो जाती तब तक कुछ भी हो सकता है.

इलाहाबाद अधिवेशन के बाद से ही वरुण गांधी अक्सर अपनी ही पार्टी पर कमान साधते नजर आए जिसकी वजह से बीजेपी से उनकी तकरार जगजाहिर है उन्होंने कभी किसानों के बारे में ट्वीट किया तो कभी अपने पार्टी के नेताओं के बारे में और यही वजह है लोग सोच रहे हैं कि इस बार बार पार्टी उन्हें टिकट नहीं देगी.

google

हाल के दिनों में अक्सर वरुण गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष और अपने भाई राहुल गांधी से मुलाकात करते हुए देखा गया जिसके कारण लोगों में यह बात भी चल रही है कि हो सकता है वरुण गांधी इस बार कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़े। फिलहाल यहाँ के समीकरण कुछ ऐसे हैं की यदि 15 लाख के आसपास इस सीट पर मतदाता है और 5 विधानसभा सीटें हैं इन 5 विधानसभा सीटों में से इसौली एक ऐसी सीट है जहां पर सपा का कब्जा है बाकी सभी सीटों पर 2014 के चुनाव में बीजेपी ने ही कब्जा किया था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *