भगवान राम की एक बहन भी थी, इस बारे में नहीं जानते होंगे आप

भगवान श्री राम में वे सभी गुण थे जो धर्म में बताये गये है | श्री राम वैदिक सनातन धर्म की जान आत्मा है |वेदों को मानने वाले श्री राम के परम भक्त है | महान महाकाव्य रामायण जिन्हें महर्षि वाल्मीकिजी ने लिखा है , श्री राम मुख्य पात्र है | अवतरित हुए भगवानो में यह सबसे प्राचीन और ऊपर है | यह सबसे अच्छे उदारण है अच्छे बेटे , अच्छे पति होने के | भगवान् श्री विष्णु के यह 7th अवतार है | श्री राम असुर सम्राट लंकापति रावण से इस धरती को बचाने के लिए अवतरित हुए |श्री राम परिचय रावण को यह वरदान प्राप्त था की वो किसी भी देवी देवता के हाथो नहीं मर सकता है अत: भगवान विष्णु मानव रूप में इस धरा पर अवतरित हुए | श्री राम को मर्यादा पुरषोतम के नाम से भी जाना जाता है.

सबसे बड़े पुत्र होने की वजह से श्री राम को अयोध्या का राज्य नियमो से राजा बनना था लेकिन सोतेली माँ कैकई स्वार्थवश अपने पुत्र भरत को राजा बनाना चाहती थी | महाराज दशरथ से उन्होंने अपने पुत्र के राज पाठ मांग लिया और श्री राम के लिए १४ वर्षो का वनवास | राजा दशरथ अपने वचनों में बंधे होने के कारण उन्हें यह स्वीकार करना पड़ा | माँ सीता और लखन भी राम के साथ वनवास चले गये |

रावण से युद्ध

वनवास के दोरान रावण ने छल से माँ सीता का हरण करके अपने साथ लंका ले गया और उनसे विवाह करने का प्रस्ताव रखा | माँ सीता ने किसी भी कीमत पर यह नही स्वीकार किया | बजरंग बलि और वानर सेना की सहायता से श्री राम ने सीता का पता लगाया और उसके बाद भीष्म युद्ध हुआ जिसमे श्री राम विजयी रहे और माँ सीता पुनः प्राप्त किया |

श्रीराम की दो बहनें भी थी एक शांता और दूसरी कुकबी। हम यहां आपको शांता के बारे में बताएंगे। दक्षिण भारत की रामायण के अनुसार राम की बहन का नाम शांता था, जो चारों भाइयों से बड़ी थीं। शांता राजा दशरथ और कौशल्या की पुत्री थीं, लेकिन पैदा होने के कुछ वर्षों बाद कुछ कारणों से राजा दशरथ ने शांता को अंगदेश के राजा रोमपद को दे दिया था।
भगवान राम की बड़ी बहन का पालन-पोषण राजा रोमपद और उनकी पत्नी वर्षिणी ने किया, जो महारानी कौशल्या की बहन अर्थात राम की मौसी थीं।

लोककथा अनुसार शांता जब पैदा हुई, तब अयोध्‍या में अकाल पड़ा और 12 वर्षों तक धरती धूल-धूल हो गई। चिंतित राजा को सलाह दी गई कि उनकी पुत्री शां‍ता ही अकाल का कारण है। राजा दशरथ ने अकाल दूर करने के लिए अपनी पुत्री शांता को वर्षिणी को दान कर दिया। उसके बाद शां‍ता कभी अयोध्‍या नहीं आई। कहते हैं कि दशरथ उसे अयोध्या बुलाने से डरते थे इसलिए कि कहीं फिर से अकाल नहीं पड़ जाए।

कुछ लोग मानते थे कि राजा दशरथ ने शां‍ता को सिर्फ इसलिए गोद दे दिया था, क्‍योंकि वह लड़की होने की वजह से उनकी उत्‍तराधिकारी नहीं बन सकती थीं।

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