माता सीता के श्राप की सजा आज भी भुगत रहे हैं धरती पर मौजूद ये 4 लोग

रामायण के बारे में तो आप सभी जानते ही होंगे कि ये हिन्दू धर्म के सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ में से एक है। और इसके साथ ही साथ इसकी बहुत ही ज्यादा मान्यता भी है जी हां आपको बताते चलें कि रामायण में बताई गई हर कहानी कहीं न कहीं हमारे जीवन से जुड़ी हुई है जिसकी वजह से हमें पल पल पर उसकी बातें याद आती है। रामायण ग्रंथ में भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से जुड़ी प्रमुख घटनाओं का वर्णन किया गया है जी हां इतना ही नहीं भगवान राम के साथ साथ माता सीता से जुड़े कई घटनाओं के बारे में बताया गया है जिसका प्रभाव आप आज भी देख सकते हें। आज हम आपको कुछ ऐसी ही बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानना आपका बेहद जरूरी है।

बताते चलें कि माता सीता ने उस काल के दौरान कुछ लोगों को झूठ बोलने के लिए श्राप दिया था। जी हां माता सीता ने श्राप दिया था, उसका प्रभाव आज भी मौजूद है। तो आइए जानते हैं कि आखिर वो कौन सी वजह थी जिसके कारण माता सीता को श्राप देना पड़ा था और वह कौन से लोग हैं, जो आज भी माता सीता द्वारा दिए गए श्राप का फल भुगत रहे हैं।

बताते चलें कि ये घटना तब की है जब अयोध्या के राजा श्री दशरथ जी की मृत्यु हुई थी। बताया जाता है कि दशरथ जी की मृत्यु के बाद भगवान श्री रामचंद्र जी भाई लक्ष्मण के साथ उनकी पिंड दान की सामग्री लेने के लिए गए हुए थे परंतु किसी कारणवश उन्हें आने में काफी समय लग रहा था और इधर पिंडदान का समय निकलता जा रहा था।

जी हां आपको ये बता दें कि माता सीता ने देखा कि पिंडदान का उचित समय खत्म होने वाला है, तो उन्होंने प्रभु श्री राम को कहा कि आपको प्रतीक्षा करने के बजाय उनकी अनुपस्थिति में ही एक निश्चित समय पर अपने ससुर का पिंडदान विधि पूर्वक कर दिया। इतना ही नहीं आपको बताते चलें कि जब श्री रामचंद्र जी वापस लौट कर आए तो सीता जी ने रामचंद्र जी से पिंडदान से जुड़ी सभी बातें बतायी। उन्होने कहा कि सभी विधि पूर्वक उन्होने पिंडदान किया है इसके साथ ही साथ माता ने यह भी कहा कि, वह पंडित, गाय, कौवा और फल्गु नदी जो पिंडदान के समय वहां पर मौजूद थे, उनसे इसके बारे में पूछ सकते हैं।

लेकिन तब भगवान श्री राम ने इन चारों से पिंड दान के बारे में पूछा तो इन चारों ने किसी भी प्रकार के पिंडदान किये जाने की बात से इंकार कर दिया जिसकी वजह से माता सीता ने नाराज होकर इन चारों को श्राप दिया। सीता जी ने पंडित को श्राप देते हुए कहा कि-पंडित के पास कितना भी धन आ जाए पर उसकी दरिद्रता नहीं मिटेगी।

इसके अलावा गाय को कहा कि हर घर में पूजा होने के बाद भी गाय को लोगों का जूठा खाना पड़ेगा। इतना ही नहीं कौवे को श्राप मिला कि अकेले खाने से कभी भी पेट नहीं भरेगा, हमेशा झुंड में खाना खाएगा और आकस्मिक मृत्यु का सामना करना पड़ेगा। वहीं फल्गु नदी को सीता मां ने श्राप दिया कि कितना भी पानी मिल जाए लेकिन यह नदी हमेशा सूखी ही रहेगी। अब जरा सोचिए उस युग में दिया हुआ माता सीता का श्राप आज भी ये लोग भुगत रहे हैं।

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