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देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना आज़ाद ने छात्रों के लिए जो काम किया, वो आज कोई नहीं कर सकता

देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद का आज 131 वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। मौलाना अबुल कलाम आजाद देश की स्वतंत्रता के लिए लड़े और वह एक मशहूर लेखक भी थे। देश की आजादी के बाद मौलाना आजाद पहले शिक्षा मंत्री के पद पर कार्यरत हुए। उन्हीं के जन्मदिन पर हर साल 11 नवंबर को भारत में नेशनल एजुकेशन डे के रूप में मनाया जाता है।

आपको बता दें कि देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को हुआ था। आजाद उर्दू में कविताएं भी लिखते थे। इन्हें लोग कलम के सिपाही के नाम से भी जानते हैं। आजादी के बाद देश के पहले शिक्षा मंत्री बने मौलाना आजाद ने यूजीसी की स्थापना की थी। इसके साथ ही मौलाना आजाद 35 साल की उम्र में कांग्रेस के सबसे नौजवान अध्यक्ष बने थे।

म’रणोप’रांत मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को भारत रत्न से भी नवाजा गया था। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जब मौलाना आजाद का नि’धन हुआ तो उनके पास कोई भी संपत्ति नहीं थी और ना ही कोई बैंक खाता था। आपको बता दें, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान के लिए उनके जन्मदिन पर साल 2015 में ‘नेशनल एजुकेशन डे’ मनाने का फैसला किया था।

शायद आपको इस बारे में जानकारी ना हो लेकिन मौलाना अबुल कलाम आजाद का असली नाम अब्दुल कलाम गुलाम मोहिद्दीन है। लेकिन उन्हें भारत में मौलाना आजाद के नाम से ही जाना जाता है। आजादी से पहले मौलाना आजाद महात्मा गांधी के सिद्धांतों का समर्थन करते थे। उन्होंने देश में हिं’दू मु’स्लिम एकता के लिए काफी महत्वपूर्ण काम किए और वह अलग मु’स्लि’म रा’ष्ट्र के सिद्धां’त का वि’रो’ध करने वाले मु’स्लि’म नेताओं में से एक थे।

आपको बता दें कि आजादी से पहले मौलाना आजाद ने शिक्षा के लिए कई अतुल्य कार्य किए और शिक्षा मंत्री बनने पर उन्होंने निशुल्क शिक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना में अत्यधिक योगदान दिया मौलाना आजाद ने ही प्रौद्योगिकी संस्थान’ (IIT) और ‘विश्वविद्यालय अनुदान आयोग’ (UGC) की स्थापना की थी।

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