प्यारे नबी (स.अ.व्.) की चार सबसे बेहतरीन नसीहतें? ज़रूर पढ़ें और शेयर करें…

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों ,आज हम आपको नबी ए करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की 4 बेहतरीन नसीहतों के बारे में बताने जा रहे हैं। 1-बच्चे हो या बूढ़े या किसी भी मजहब के लोग सभी तकदीर को मानते हैं सबका कहना है कि तकदीर में जो लिखा है वह होकर रहेगा या तकदीर का लिखा कोई बदल नहीं सकता लेकिन दोस्तों क्या आप यह जानते हैं कि एक चीज है जो तकदीर को भी बदल सकती है हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया की “दुआ” ऐसी चीज है जो तकदीर को भी बदल सकती है.

अगर कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है या कोई खतरा हो या हमारी ऐसी कोई ख्वाहिश जो हमारी किस्मत में ना हो और अगर हम अल्लाह से तहे दिल से या रो रो कर दुआ मांगे तो अल्लाह रब्बुल इज्जत हमारी दुआ को जरूर कुबूल करता है। इसलिए कहा जाता है कि अगर तकदीर से आगे कुछ है तो वह दुआ है.

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2-दोस्तों सभी जानते हैं कि इंसान की उम्र अल्लाह ने पहले से ही यह तय कर दी है कौन इंसान कितने दिन तक जिंदा रहेगा और किस दिन उसको मौत आनी है यह सब पहले से लिखा चुका है लेकिन क्या आपको पता है एक ऐसी चीज है जो इंसान की उम्र को लंबा कर सकती है आइए आपको बताते हैं वह कौन सी चीज है जो इंसान की उम्र को लंबा करती है. दोस्तों हमें बचपन से सिखाया जाता है कि हमें नेक काम करना चाहिए और बुराइयों से बचना चाहिए नेकी करना अच्छी बात होती है नेकी करने वाला अल्लाह के करीब होता है आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया है कि नेकी करने से इंसान की उम्र भी लंबी होती है अगर इंसान की उम्र पहले से तय हो तो उसकी मौत को कोई बदल नहीं सकता है लेकिन उसके द्वारा की गई नेकीयां उसकी उम्र को लंबा कर सकती हैं.

3 – हमारे प्यारे नबी ने तीसरी नसीहत यह दी कि इंसान को हमेशा अपने माल और अपनी जान का सदका देना चाहिए ।सदका ऐसी चीज है जो आपकी और आपके माल की हिफाजत करता है ।एक बार किसी इंसान ने हजरत अली से पूछा कि सदका क्या है तो आपने कहा कि सदका वह है जो आपकी और आपके माल की हिफाजत करता है ।अपनी हलाल कमाई के कुछ हिस्से से किसी मुस्तहिक़ की मदद करना सदका है। सिर्फ इतना ही नहीं लोगों की खुशी का ख्याल रखना मां बाप को खुशी देना भी एक तरह का सदका है.

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आप सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया है कि हर सुबह आसमान से 2 फरिश्ते उतरते हैं पहला फरिश्ता कहता है कि ऐ अल्लाह जो इंसान सदका खैरात करता है या अल्लाह की राह में खर्च करता है उसे उसके सदके का बदला दे।वहीं दूसरा फरिश्ता अल्लाह से कहता है कि ऐ अल्लाह कंजूस के माल को बर्बाद कर दे। ( बुखारी शरीफ ,हदीस न. 1442). प्यारे नबी ने अपनी चौथी नसीहत में यह कहा है सिर्फ जकात ही इंसान के माल को पाक करती है बेशक जकात इस्लाम के पांच बुनियादी अरकानों में से एक है। इस्लाम में नमाज और जकात को ज्यादा तवज्जो दिया जाता है क्योंकि नमाज बदनी इबादत के लिए है और जकात माली इबादत के लिए है.

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