नमाज़ के बाद दुआ कैसे मांगे कि दुआ क़बूल हो जाए, इस तरह से मांगें दुआ…

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों आज हम आपको बताएंगे की नमाज के बाद कौन सी दुआ पढ़ना चाहिए? दोस्तों सबसे पहले तो आप यह बात याद रखें कि जब हम नमाज पढ़ते हैं तो हमें दो बार दुआ मांगने का मौका मिलता है सबसे पहले तो जब हम फर्ज नमाज पढ़ते हैं उसके बाद ।फिर जब नमाज मुकम्मल हो जाती है उसके बाद। तो आइए दोस्तों हम आपको पहले बताते हैं कि फर्ज नमाज के बाद क्या दुआ पढ़ना चाहिए.

दोस्तों जब हम मस्जिद में इमाम साहब के पीछे खड़े होकर नमाज़ पढ़ते हैं तो इमाम साहब फर्ज नमाज के बाद बुलंद आवाज में दुआ मांगते हैं उस वक्त हमें दुआ मांगने की जरूरत नहीं सिर्फ इमाम साहब की दुआ के बाद आमीन कहना चाहिए लेकिन जब हम अकेले में नमाज़ पढ़ते हैं तब हमें कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए यह हम आपको बताते हैं. मेरे इस्लामिक भाइयों फर्ज नमाज पढ़ने के बाद सबसे पहले तो आप दरूद शरीफ पढ़े.

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जो भी दरू शरीफ आपको याद हो उसके बाद आप यह दुआ पढ़ें- “अल्लाहुम्मा अंता सलामु व मिनक्स सलामू व इलाईका यरजी यूस सलाम फाहिय्याना रबबना बिस्सलामी व अदखिलना दरस सलाम तबारक्ता रब्बना व ताअलयता या जल जलाले वलिकराम।” इसके बाद “व बस सल्लल्लाहो तअला अला खैरी खलकिहि मुहम्मदुन व अला आलेही व शबिही आजमाईन बी रहमतिका अरहमर राहमीन।”

इस दुआ को पढ़े और अपने चेहरे पर अपने हाथ को फेर ले। दोस्तों अगर आपको यह दुआ याद नहीं है तो आप कोई दूसरी दुआ भी पढ़ सकते हैं। दोस्तों फिर जब हम पूरी नमाज पढ़ लेते हैं तब सबसे पहले आपको दरूद शरीफ पढ़ना चाहिए। उसके बाद है आप “रब्बाना आतीना” पढे। उसके बाद आप ये दुआ पढ़े रब्बना फगफिर लना जुनुबना व कफ्फिर अन्ना सय्येअतिना व तवफ़्फ़ना मा अल अबरार।

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फिर ये पढ़े- रब्बना तकब्बल मिन्ना इन्नका अन्तस् समिउल अलीम व तुबा अलैना इन्नका अंतत तव्वाबुर्रहीम। दोस्तो आप ये सब दुआएं पढ़े और अगर आपको ये याद नहीं है तो आपको जिस ज़बान में दुआ मांगना हो आप मांग सकते हैं। यानी कि अगर आपको अरबी की यह दुआ याद नहीं है तो आप को जो भी भाषा आती हो जो भी जुबान आती हो आप उसी भाषा में अल्लाह से अपने लिए और हर मुसलमान के लिए दुआ करें। दोस्तों अपनी जबान में कैसे दुआ मांगते हैं यह मैं आपको अब बताता हूं ।

सबसे पहले दो आप दरूद शरीफ पढ़े। फिर आप यह कहे कि ए मेरे परवरदिगार तमाम तारीफें तेरे ही लिए हैं तू सबसे रहीम और करीम है एक तू ही इबादत के लायक है और कोई इबादत के लायक नहीं। ए मेरे अल्लाह मैं गुनहगार हूं खतावार हूं मैं अपने गुनाहों का इकरार करता हूं अल्लाह तू अपने हबीब के सदके में मेरे गुनाहों को माफ कर दे। या अल्लाह तू मेरे मां बाप के गुनाहों को माफ कर दे.

ए अल्लाह जो मैंने आज तक गुनाह किए हैं उसकी मुझे माफी दे दे और आगे जो मुझसे गुनाह होने वाले हैं उससे मुझे बचा ले। ए मेरे मालिक मुझे और तमाम मुसलमानों को गुनाहों से बचने की तौफीक अता फरमा ।ए मेरे अल्लाह मूझेऔर तमाम मुसलमानों की नमाज को कुबूल फरमा। ए अल्लाह मुझे और तमाम मुसलमानों को सारी मुसीबतों और बलाओं से बचा। ए अल्लाह मुझे और तमाम मुसलमानों को खुशी के पांच वक्ति नमाज का पाबंद बना।

ए अल्लाह मेरी और तमाम मुसलमानों की जाएज़ कमाई में बरकत अता फरमा। दोस्तों आप इस तरह से दुआ मांग सकते हैं उम्मीद है कि अल्लाह आपकी दुआ जरूर कबूल करेगा और इसके अलावा आप जो कुछ भी जायज चीज अल्लाह से मांग सकते हैं इंशा अल्लाह आपकी दुआ जरूर कबूल होगी.

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