पति-पत्नी के स’म्बन्ध में एक बहुत बड़ी गल’ती जिसे हम मा’मूली समझते हैं, जानिए…

अस्सलामोअलैकुम नाज़रीन भाइयों और बहनों, मियां बी’वी का रि’श्ता दुनिया मे सबसे पहले बना है ये बहुत अहम रिश्ता है अपने हर रिश्ते में मुहब्बत रखो।बीवी से इज़हारे मुहब्बत करो। हमारे न’बी की बाते सुनकर आप गुम हो जायंगे,”अए आयशा मुझे जबसे पता चला है ज’न्नत मे भी मेरी बी’वी तू है तो मेरा म-रना आसान हो गया है”। डिग्रियों से घर नही चलते घर को ज़िन्दगी इज़हा’रे मुहब्बत से क’टेगी। अ’ल्लाह ताला सुलह करने वालो को बहुत पसंद करता है बीवी से ल’ड़ो और सुलह करलो तो अल्लाह पिछले सारे गु’ना’ह मा’फ कर देते हैं.

सबसे पहले जब हिसाब होगा मिंया से बीवी से सुलूक और बीवी का मिंया से सुलूक तौला जायगा।ये इतना बड़ा रिश्ता है। मेरे भाइयों और बहनों आज हम आपको मिंया बीवी के ताल्लुक से उन ग’लतियों को बतायेगें जिसे मामूली समझते है लेकिन श’रीयत में गुनाह है आप ये ना समझे जो हम बताने जार हे बे’हयाई है ये श’रीयत का इल्म है इसकी हम सबको जानकारी होनी चाहिये- पहला गु’नाह जिसे मामूली समझा जाता है वो ये है कि बी’वी का अपने शौहर के करीब आने से इं’कार करना,हम’बि’स्त’री से इं’कार करना हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जा’मए सगीर के अंदर ये रिवायत है जो आपने फ’रमाया की शौहर बीवी को बुलाये तो बीवी पर वाजिब है कि उसके पास जाएं अगर कोई शरईउज्र (ऐसी कोई मजबूरी जो मजबूरी हो) अगर वो नही है तो आप फरमाते है आप अपने शौहर की बात मानले चाहे वो ऊंट पर ही क्यो न बैठा हो जाना पड़ेगा आप उसे इं’कार नही कर सकती.

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जो बीवी अपने शौहर को हक देना चाहती वह इस बात को मद्देनजर रखें अगर इसमें फिर कोताही होती है तो इंसान दूसरी जगह ख्वा’हिश पूरी करने की कोशिश करता है फिर वह ब’र्दाश्त नहीं होता औ’रत को, फिर यह सोचता है कि यह बीवी तो मेरी राजी नहीं होती है बात नही मानती। जो शौहर अपनी बीवी को बुलाये बीवी ने जाये तो फरिश्ते रात भर उस पर लानत भेजते रहते हैं अगर शौहर गुस्से की हालत में सो जाए ये 1 हदीस की रवायत है.

दूसरी चीज जो मियां बीवी के रिश्ते में मामूली समझ लिया गया है वह यह है कि औ’रत का बिना किसी शरई उज्र के अपने शौहर से तलाक मांगना मुझे तलाक दे दो बिना किसी मजबूरी के बिना किसी परेशानी के जामाए सगीर में हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया, बिना किसी वजह से तलाक मांगने वाली अपना घर उजाड़ने वालियां यह उस उम्मत की मुनाफिक है जिस औ’रत ने बिना किसी वजह के अपने शौहर से तलाक मांगा इस पर जहन्नुम वाजिब और जन्नत की खुशबू कभी न महसूस कर सकेगी। बिना किसी ज़ायज़ वजह के छोटी मोटी बातो के लिये लोग आज शौहर को छोड़देते है तलाक़ मांगते है कि उनकी इनकम कम है गुजारा नहीं हो रहा है.

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हमारी मां बहनों को चाहिए इस बात को बहुत सीरियसली ले मां बाप को चाहिए अपनी बेटियों को समझाएं छोटी मोटी बातों पर अपनी बच्चियों को ना बैठा ले तलाक शौहर का हक है और बेटी डिमांड करती हैं। तीसरा गुना मियां बीवी के तालुक से हालते हैज़ के अंदर बीवी से हमबि’स्तरी करना अभी जब निकाल कर रहा है आदमी जब निकाह कररहा उसके ताल्लुक से सारे आदाब को सीखना चाहिए दुनिया की तमाम चीजों के अंदर ट्रेनिंग प्रोग्राम होते हैं उनको सीखा जा रहा है लेकिन शरीयत के मुताबिक कोई चीज हो तो उसको सीखने में श’र्म आती दुनिया की बेहयाई में हमको श’र्म’ नहीं आती.

हमारे बच्चे 11वीं 12वीं में साइंस के अंदर और’त और मर्द के जिस्म के सभी हिस्सों की तफसील से पढ़ते है तो उसमें श’र्म नहीं आती है वह पढ़ाना मंजूर है लेकिन बच्चे को यह सिखाना की शरीयत में यह बताया गया है तो श’र्म आती है इनबातों को ना बताने की वजह से उम्मत में बुराइयां फैल रही है. चौथा गुना जिसे मामूली समझ लिया गया वह यह है किसी गैर मोहरम औ’रत के साथ अकेले में मुलाकात करना और किसी गैर मोहरम और’त से हाथ मिलाना यह बहुत बुरी बात है नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं तिरमीरी की रिवायत है जब भी कोई आदमी किसी औ’रत से तन्हाई में मिलता है तो तीसरा उसमें शैतान होता है.

वह तीन हो जाते हैं जब बारूद और आग चाहे जितने भी अच्छे दोस्त हो बारूद और आग मिलते हैं तो धमाका होना ही है मेरी बात याद रखिए मर्द और औ’रत जब मिलते हैं तो कितनी भी अच्छी नियत से मिले यह धमाका होना ही है यह कभी साथ नहीं रह सकते इसी तरह आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं गैर मोहरम और’त से हाथ मिलाना तो बहुत दूर की बात है कि तुम उन्हें छू भी नही सकते।उनसे बेहतर होगा तुम में से कोई भी 1 कील सर में ठोक लेना बशर्ते इसके कि किसी गैर मोरम को ध’क्का लगाना छूना और हाथ मिलाना. इसको लोग फख्र स्टेटस की बात समझते है।नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कभी किसी और’त का नंगा हाथ देखना भी पसंद नहीं किया। लोग कहते है समाज में चलता है।तो दोस्तो हम सबको हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बातों पर अमल करना चाहिए।अल्लाह ताला हमसबको अमल करने की तौफ़ीक़ आता फरमाए.

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