क़ु’रान के इस च’मत्का’र से उ’ड़े वैज्ञा’निकों के भी हो’श, है’रान हुए…

जिन लोगों ने इतिहास का अध्ययन किया है वो बताते हैं कि सैंकड़ों साल बाद भी जब कोई प्रा’चीन जगह मिल जाती है और उसमें सामान कुछ रह जाता है तो अधिकतर सामान सड़ चुका होता है. परन्तु खाने के सामान में बस एक ही ऐसा आइटम है जो शुद्ध रह जाता है. जी हाँ, हम शहद की बात कर रहे हैं. शहद एक ऐसा प्रोडक्ट है जो कभी ख़राब नहीं होता है.

शहद हमारी से’ह’त के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन आजकल असली शहद को ढूँढ पाना काफ़ी मुश्किल काम हो गया है. क्योंकि अब कई बड़ी कंपनियां शहद में चीनी मिलाकर बेचना शुरू कर चुकी हैं। एक वक्त हुआ करता था जब लोगों के पास प्रा’कृति’क शहद पहुंचता था यानी कि जो शहद मधुमक्खियां बनाती हैं। क्या आपने कभी मधुमक्खियों द्वारा बनाया गया शहद देखा है। अगर नहीं तो आइए आपको बताते हैं कि मधुमक्खियों द्वारा शहद कैसे बनाया जाता है।

अगर आपने कभी मधुमक्खियों का छत्ता देखा हो तो सोचिए वह दिखने में कैसा होता है। आपको बता दें कि मधुमक्खियां अपना छत्ता हेक्सागोनल शेप में बनाती हैं। क्योंकि जगह का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए कोई भी दूसरा रूप इतनी खूबसूरती से एक साथ नहीं बैठता है। अगर मधुमक्खियां सर्कल या फिर पेंटागनल शेप में अपना छत्ता बनाएंगी तो वह जगह का सही इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। वहीँ सर्किल और पेंटागन शेप के अलावा दो ऐसी शेप और हैं जो की जगह घेरने में बहुत ही कम होते हैं।

यह हैं ट्रायंगल और स्क्वायर। लेकिन ट्रायंगल और स्क्वायर दोनों में ही छता बनाने के लिए ज्यादा मोम लगता है। इसका मतलब है कि मधुमक्खियों के लिए सबसे ज्यादा सही शेप छत्ता बनाने के लिए सिर्फ हेक्सागोनल ही है। अब जरा सोचिए कि मधुमक्खियों के पास यह का’बिलि’यत कहां से आई ? किसने मधुमक्खियों को इतनी समझदारी दी।

Honey pouring into dish

आपको बता दें कि कु’रा’न की सू’र’ह की आ’यत नंबर 68 और 69 में बताया गया है कि अ’ल्ला’ह ने शहद की मक्खी को सिखाया है कि वह अपना छत्ता बनाएं पेड़ों में, पहाड़ों में और जहां इंसान रहते हैं। अ’ल्ला’ह ताला ने मधुमखियों को सिखाया है कि वे महारत के साथ अपना रास्ता ढूंढते हुए चलें। साइंस में भी ये कहा गया है कि जब भी मधुमक्खी किसी फूल का रस चूस कर वापस अपने छत्ते में आती है तो वह बहुत ही छोटे से छोटा रास्ता अपनाती है।

मधुमक्खी बाकी मधुमखियों को भी उस फूल का सही रास्ता बताती हैं। जिसके लिए एक विशेष तरह का डांस करते हैं। जिसे बी डांस कहते हैं। इसी तरह सारी मधुमक्खियां उस रास्ते को जान जाती हैं और उसी फूल पर जाती हैं। फिर यह सभी मधुमक्खियां उस फूल का रस लेकर वापस उसी रास्ते से अपने छत्ते तक पहुंचती हैं। बी डांस की खोज के लिए कार्ल वॉन फ्रिस्ट नाम के साइंटिस्ट को साल 1973 में नोबेल प्राइज भी दिया गया है। जो बात अ’ल्ला’ह ता’ला ने कु’रान में 14 साल पहले ही लिख डाली थी। वह बात साइंस को बहुत देर बाद पता चली है।

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