रविश कुमार को मिला ‘एशिया का नोबेल’, इनको भी…

पत्र’कारिता के क्षेत्र में रवीश कुमार की एक अलग ही पहचान है. उनके बारे में माना जाता है कि वो बुनियादी मु’द्दों को उठाते हुए बात करते हैं. आजकल के शोर-शराबे वाले दौर में भी रवीश कुमार ने पत्रका’रिता में एक सच्चाई क़ायम रक्खी है. अब रवीश कुमार के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है. उन्हें एशिया के नोबेल माने जाने वाले रेमॉन मैग्सेस अवार्ड से नवाज़ा गया है. रवीश कुमार के अलावा चार अन्य को भी रमन मैग्सेसे सम्मान से नवाजा गया है.अवार्ड पाने वालो में स्वे विन,अंगखाना नीलापजित,रेमुंडो पुजांते केययाब और किम जोंग-की शामिल हैं.

पांच अलग अलग वर्ग यह सम्मान दिया गया है.रवीश कुमार ने जिस प्रकार से टीवी में पत्र’कारिता का परचम लहराया है उस वजह से उन्हें ये पुरूस्कार दिया गया जाएगा.उन्हें पुरस्कार 9 सितंबर को फिलिपिंस की राजधानी मनीला में दिया जाएगा.साल 2018 में दो भारतीय को यह सम्मान मिला था,इनमें मनोचिकित्सक भारत वाटवानी और आर्थिक प्रगति के लिए विज्ञान और संस्कृति को रचनात्मक रूप से काम में लाकर लद्दाखी युवकों की जिंदगियां बदलने वाले सोनम वांगचुक शामिल थे.


रेमन मैग्सेसे पुरस्कार सालान तौर पर दिया जाने वाला पुरस्कार है,जो फिलीपीन के पूर्व राष्ट्रपति रेमॉन मैग्सेसे की याद में दिया जाता है.यह पुरस्कार अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है.यह पुरस्कार ऐसे व्यक्तियों और संगठनों को दिया जाता है जो नस्ल,पंथ,राष्ट्रीयता और लिंग की परवाह किए बिना अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हैं.

साल 1958 से दिए जाने वाले इस पुरस्कार को एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है.मुख्त तौर पर यह पुरस्कार सरकारी सेवा,सार्वजनिक सेवा, सामुदायिक नेतृत्व,पत्रकारिता,साहित्य और रचनात्मक संचार कला और शांति और अंतर्राष्ट्रीय समझ जैसे क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर चुके व्यक्ति और संस्थाओं को दिया जाता है.

साल 1958 में विनोभा भावे ऐसे भारतीय थे जिन्हें पहली बार इस सम्मान से सम्मानित किया गया था.उन्य चर्चित नामों में मदर टेरेसा (1962),जयप्रकाश नारायण (1965),सत्यजीत रे (1967),चंदी प्रसाद भट्ट (1982),अरुण शौरी (1982),किरन बेदी (1994),अरविंद केजरीवाल (2006),पी साईनाथ (2007) जैसी शख्सियतें हैं जिन्हें रमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

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