यूपी की इस सीट पर मतदान के बाद गायब हो गयी EVM,अब प्रशासन ने ये किया..

उत्तर प्रदेश के महोबा ज़िले में सोमवार को हुए मतदान के बाद वोटों से भरी एक EVM मशीन गायब हो जाने से हड़कंप मच गया.निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के होश उड़ गए.रात भर उस प्रशासन EVM को ढूंढता रहा.तब जाकर 15 घंटे बाद मंगलवार को वह मशीन बरामद कर ली गई. तब जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली.

हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी लोकसभा सीट 47 पर चौथे चरण में मतदान के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है.मतदान स्थल से पीठासीन अधिकारी की लापरवाही के चलते सोमवार की शाम वोटिंग प्रकिया खत्म हो जाने के बाद ईवीएम मशीन अचानक गायब हो गई.देर रात स्ट्रांग रूम में ईवीएम मशीनों की गिनती के दौरान मशीन गायब होने की जानकारी मिलते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया.

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आनन-फानन में जिला निर्वाचन अधिकारी और पुलिस अधीक्षक सहित तमाम आलाधिकारियों ने खोजबीन की.लेकिन कोई सफलता हाथ नहीं लगी.मंगलवार को भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ईवीएम मशीन की तलाश में जुटे रहे.लापरवाह पीठासीन अधिकारी सहित मतदान में लगे अन्यकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.

मामला महोबा ज़िले के पनवाड़ी थाना क्षेत्र के नोगांव फंदना गांव का है. जहां लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में हुए मतदान के बाद राजकीय पॉलीटेक्निक में बनाए गए स्ट्रांग रूम में ईवीएम मशीनों का मिलान चल रहा था. तभी गिनती में एक मशीन गायब मिली. इस बात की जानकारी होते ही जिला पीठासीन अधिकारी सहित सभी आलाधिकारियों में हड़कंप मच गया.

मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी सहदेव, पुलिस अधीक्षक स्वामीनाथ सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव में पहुंच मशीन को तलाश करने का प्रयास किया मगर सफलता हाथ नहीं लगी.पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी गांव में डेरा डालकर ग्रामीणों की मदद से ईवीएम मशीन तलाशते रहे.

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इसी दौरान बूथ क्रमांक 127 पर तैनात मतदान अधिकारी नशरद नगायच,मतदान अधिकारी रजिया बेगम, मतदान अधिकारी अमरेंद्र कुमार,पीठासीन अधिकारी कमलेश कुमार को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की गई.गांव वालों से भी पुलिस लगातार पूछताछ करती रही.देर रात तक मतदान स्थल पर भी कई बार छानबीन की गई.

मगर ईवीएम का पता नहीं चल पाया.अधिकारियों ने इस मामले को लेकर चुप्पी साध ली थी. उधर, सपा यूथ बिग्रेड के जिला अध्यक्ष रोशन छोटे मियां ने इस मामले को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप निशाना साधा. मगर 15 घंटे बाद ईवीएम मशीन स्थानीय बस स्टैंड से बरामद कर ली गई. जिला प्रशासन इतनी बड़ी घटना को छिपाने की कोशिश करता रहा. लेकिन मामला सुर्खियों में आ गया. फिलहाल, कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.

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