माता सीता के इस श्राप को आज भी भुगत रही है दुनिया !

प्रभु श्रीराम के अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वनवास जाने की बात हम सभी जानते हैं। इस बात से अयोध्या के सभी निवासी दुखी थे। राजा दशरथ, राम और लक्ष्मण के वियोग के इस दर्द को झेल नहीं सकें और उनकी मृत्यु हो गई। पिता की मृत्यु के इस खबर से राम और लक्ष्मण सभी को गहरी ठेस पहुंची।

दोनों ने ही जंगल में ही पिंडदान करने का निश्चय किया। इसके लिए राम और लक्ष्मण दोनों जंगल में ही आवश्यक सामग्री को एकत्रित करने के उद्देश्य से निकल गए। इधर पिंडदान का समय निकलता ही जा रहा था। समय के महत्व को समझते हुए माता सीता ने अपने पिता समान ससुर दशरथ का पिंडदान उसी समय राम और लक्ष्मण की उपस्थिति के बिना किया।

माता सीता ने पूरी विधि विधान का पालन कर इसे सम्पन्न किया। कुछ समय बाद जब राम और लक्ष्मण लौटकर आए तो माता सीता ने उन्हें पूरी बात बताई और यह भी कहा कि उस वक्त पंडित, गाय, कौवा और फल्गु नदी वहां उपस्थित थे। साक्षी के तौर पर इन चारों से सच्चाई का पता लगा सकते हैं।

इस दुनिया में शायद ही कोई इंसान ऐसा होगा जो रामायण की गाथा के बारे में न जानता हो. इसलिए आज हम आपको रामायण की गाथा के बारे में नहीं बल्कि उस किस्से के बारे में बताएंगे, जिसके बारे में शायद ही कोई जानता हो. जी हां ये तो सब जानते ही है, कि जब राम और लक्ष्मण जी वनवास काटने गए थे, तब उनके पीछे से उनके पिता यानि राजा दशरथ की मृत्यु हो गई थी. दरअसल राजा दशरथ अपने दोनों पुत्रो से वियोग का दुःख सहन नहीं कर पाए, जिसके चलते उनकी मृत्यु हो गई.

बता दे कि राजा दशरथ की मृत्यु की सूचना मिलने पर राम और लक्ष्मण जी पिंडदान की व्यवस्था के लिए वन में से जरुरी सामग्री लेने के लिए चले गए. मगर उन्हें वापिस लौटने में देर हो गई. ऐसे में माता सीता को चिंता होने लगे और समय की नब्ज को देखते हुए माता सीता ने खुद पिंडदान करने का निश्चय किया. जी हां आपको बता दे कि राजा दशरथ का पिंडदान उनके पुत्रो ने नहीं, बल्कि सीता जी ने किया था. बरहलाल इसके बाद जब राम और लक्ष्मण जी वापिस आये तो सीता जी ने उनसे कहा कि आपने आने में बहुत देर कर दी थी और इसलिए उन्होंने खुद ही राजा दशरथ का पिंडदान कर दिया.

इसके इलावा सीता माता ने अपने इस पिंडदान के साक्षी पंडित, गाय, गोवा और पास में बहने वाली फल्गु नदी को बताया. मगर जब श्रीराम ने इन चारो से पिंडदान की पुष्टि के बारे में पूछा तो इन चारो ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ. ऐसे में न केवल माँ सीता बल्कि राम जी भी क्रोधित हो गए, कि सीता झूठ कैसे बोल सकती है. आपको जान कर हैरानी होगी कि सीता जी ने अपनी सच्चाई का सबूत देने के लिए राजा दशरथ की आत्मा से श्रीराम के सामने आहन किया, तब जाकर सीता जी की सच्चाई साबित हुई. लेकिन ये बात यही खत्म नहीं हुई, क्यूकि इसके बाद सीता जी ने इन चारो को श्राप भी दिया था.

जी हां सीता जी ने पंडित को श्राप दिया कि तुम कितना भी मांग लो, पर तुम्हरी गरीबी नहीं जायेगी. इसके साथ ही सीता जी ने नदी को श्राप देते हुए कहा कि फल्गु नदी सूख जायेगी और गोवा आप कभी अपना पेट नहीं भर पाओगे. वही गाय को श्राप देते हुए कहा कि लोग आपकी पूजा तो करेंगे, लेकिन आपको हमेशा झूठा ही खाने को मिलेगा. बरहलाल इसमें कोई शक नहीं कि सीता माँ ने जो श्राप उस युग में दिए थे, वो आज के समय में सच हो चुके है. इसलिए हम तो यही कहेगे कि झूठ बोलने से ज्यादा नुकसान खुद का ही होता है.

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