ऐक्टिंग छोड़ ढाबे पर झूठे कप धोने लगे थे संजय मिश्रा, एक दिन के मिलते थे इतने रुपए

बॉलिवुड के दिग्गज कलाकार संजय मिश्रा ने अपने किरादरों से फैन्स के बीच एक खास जगह बनाई है। संजय हर तरह के किरदार निभा चुके हैं मगर उन्हें खास तौर पर कॉमिडी फिल्मों में ज्यादा पसंद किया गया है। उन्होंने अपने करियर में गोलमाल, वेलकम, धमाल, ऑल द बेस्ट और फंस गए रे ओबामा जैसी सुपरहिट कॉमिडी फिल्मों में काम किया है। 6 अक्टूबर 2021 को संजय अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं।

आज भले ही संजय एक जाने-माने ऐक्टर हैं लेकिन कम ही लोगों को पता है कि एक बार संजय मिश्रा ने फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ने का मन बना लिया था। एक न्यूज पोर्टल से बात करते हुए संजय मिश्रा ने कहा था कि एक समय पर वह निजी जिंदगी में काफी परेशान थे। इस कारण उन्होंने अपना प्रफेशन बदलने के बारे में भी विचार किया था। सजय ने बताया कि वह काफी बीमार थे और उसी समय उनके पिता का भी निधन हो गया था।

इसके बाद संजय मुंबई छोड़कर ऋषिकेश चले गए। ऋषिकेश में संजय एक ढाबे में ऑमलेट बनाते थे और झूठे कप धोया करते थे। इसके लिए उन्हें केवल 150 रुपये मिलते थे।  ढाबे पर लोग उन्हें पहचान भी जाते थे क्योंकि तब तक संजय तब तक ‘गोलमाल’ जैसी पॉप्युलर फिल्म में काम कर चुके थे। इसके बाद संजय के पास रोहित शेट्टी की फिल्म ‘ऑल द बेस्ट’ का ऑफर आया और वह वापस फिल्मों में काम करने लगे। बता दें कि 1963 में जन्मे संजय मिश्रा ने बीएचयू से पढ़ाई करने के बाद नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से ऐक्टिंग में ग्रैजुएशन किया है। 1991 से ऐक्टिंग कर रहे संजय मिश्रा ने टीवी सीरियल ‘ऑफिस ऑफिस’ में शुक्ला के किरदार से घर-घर में अपनी पहचान बना ली थी।

बॉलिवुड ऐक्टर संजय मिश्रा अब किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। फिल्मों में बेहतरीन और यादगार कॉमिडी से लेकर सीरियस कर चुके संजय का सफर इतना आसान नहीं था। हाल में उन्होंने ‘मुंबई मिरर’ से बात करते हुए अपने बारे में बहुत सी ऐसी बातें बताईं जिन्हें लोग कम ही लोग जानते हैं।

बिहार के दरभंगा जिले के संजय मिश्रा देश के प्रतिष्ठित ऐक्टिंग स्कूल नैशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के ग्रैजुएट हैं, जहां से ओमपुरी, अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह, इरफान और तिग्मांशु धूलिया जैसे धमाकेदार ऐक्टर्स बॉलिवुड को मिले हैं। हालांकि एनएसडी से बॉलिवुड तक का सफर संजय के लिए बेहद कठिन रहा था।

एनएसडी के बाद संजय को सबसे पहला ब्रेक दूरदर्शन के सीरियल ‘चाणक्य’ में एक छोटे से रोल के रूप में मिला। इस सीरियल में उन्होंने सिर्फ इसलिए काम किया था क्योंकि इसकी शूटिंग दिल्ली में हो रही थी और उन्हें मुंबई जाने के लिए रुपयों की सख्त जरूरत थी।

संजय की शुरुआत बहुत खराब रही थी। उन्होंने बताया कि चाणक्य में पहले ही सीन में उन्होंने 28 रीटेक्स दिए थे। संजय पहली बार कैमरा फेस कर रहे थे जिसके कारण वह अपने सारे डायलॉग्स ही भूल गए। इस सीरियल में अपने रोल के लिए संजय मिश्रा को 8 महीने गंजा भी रहना पड़ा। संजय बताते हैं कि उनके पास घर का किराया तक देने के लिए पैसे नहीं थे और तभी उनके पास ‘ऑफिस ऑफिस’ का ऑफर आया। संजय इस सीरियल में काम नहीं करना चाहते थे लेकिन केवल पैसों के लिए उन्होंने इस सीरियल को साइन कर लिया। ‘ऑफिस ऑफिस’ में अधिकारी से लेकर क्लर्क तक के रोल आपस में बदले जाते थे लेकिन ऑफिस के चपरासी का रोल हमेशा संजय को ही मिलता था। पहले संजय को अजीब लगा लेकिन बाद में उन्हें भी यही रोल भा गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.