अगर अल्लाह दौलत दे तो एक काम हरगिज़ ना करना, मौलाना ने बताया तकब्बुर का अंजाम क्या होगा?

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अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों कभी भी घमंड ना करो क्योंकि अल्लाह ने कहा है कि हर जानदार को मौत आनी है तो फिर घमंड किस बात का? अल्लाह जब रिज़्क़ दे तो झुक जाओ गुरुर मत करो ।हमारे प्यारे नबी नौकरों के साथ बैठकर खाना खाया करते थे और तुम्हारे घरों में नौकरों के बर्तन अलग होते हैं। अगर तुम्हारे बर्तन में कोई नौकर पानी पी ले तो उसकी शामत आ जाती है ,अगर तुम्हारे बर्तन में नौकर रोटी खा ले तो उसकी शा’मत आ जाती यह सब अच्छी बातें नहीं है.

इंसान के जिस्म में सिर्फ एक सांस ही तो है जिसके निकल जाने से इंसान लाश में तब्दील हो जाता है ।सब उसे मु’र्दा कहने लगते हैं चाहे वह बड़े से बडी हसती क्यों न हो ।हर कोई उसे ला’श ही कहता है यहां तक कि आपकी खुद की औलाद और बीवी तक कहेगी कि म’य्य’त उठाओ ।कोई यह नहीं कहने आएगा कि “सदर साहब “को उठाओ “प्रधानमंत्री” को उठाओ “अल्लामा साहब” को उठाओ, “डॉक्टर साहब” को उठाओ, “वकील साहब” को उठाओ.

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ए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों क्यों तुम इस मिट जाने वाली दुनिया पर घमंड करते हो क्यों? तुम अपनी हस्ती और औकात को क्यों भूल जाते हो ?क्यों तुम अल्लाह के दूसरे बंदे और बंदियों के साथ जानवरों की तरह सुलूक करते हो ।सिर्फ तुम किसी की क’ब’र खोद कर देख लो तुम्हें सब याद आ जाएगा कि तुम्हारी क्या औकात है.

सिकंदर की मिसाल ले लो वह दुनिया को फतह करने निकला था ।12 साल में दुनिया को इधर से उधर कर दिया उसने। फिर जब वह मुल्तान को फतह कर चुका था तो मुल्तान में ही उसे तीर लगा तब वह ईरान पहुंचा। उसने लोगों पर बहुत जुल्म किए हैं ।इंसान तो इंसान कुत्ते बिल्लियों तक का उसने सर कटवा दिया, फिर मौ-त ने उसे ऐसा झटका दिया कि वह कुछ ना कर सका। केवल 32 साल 10 महीने की ही जिंदगी थी उसकी। जिस वक्त वह मर रहा था उसने उस वक्त गिड़गिड़ाते हुए लोगों से कहा कि क्या कोई है जो मेरी आखिरी ख्वाहिश पूरी कर दे?

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कोई है जो मेरी सारी सल्तनत ले ले और बदले में मुझे कुछ दिन की जिंदगी दे दे ?मैं अपने देश में म’र’ना चाहता हूं सिर्फ 30 दिनों में वह अपने देश पहुंच जाता लेकिन उसके पास इतनी मोहलत नहीं थी कि वह अपने देश पहुंच सकें। लाखो इंसानों की गर्दन क’ट’वाने वाले को अल्लाह ने चूहे की तरह मौ-त दी । ऐसा करके अल्लाह ने सबको बता दिया कि कभी खुद पर गुरुर ना करो यह तो सिर्फ इंसान की मौ-त थी ,मैंने हर एक जर्रे को मौ-त दी है चाहे वह जमीन हो या आसमान हो ,पहाड़ हो या सितारे ,चांद हो या सूरज हो.
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एक वक्त ऐसा आएगा जब मैं हर किसी को मौ-त दे दूंगा और तब मैं पूछूंगा यह बताओ कि किसे गुरूर है अब?कौन बाकी है ?तब इजरायल अली सलाम कहेंगे कि अभी तो सारे फरिश्ते बाकी है और हम चार बाकी हैं ।अल्लाह का हुक्म होगा कि इज़राइल और मिकाइल को भी मौ-त आ जाए। उस वक्त कभी ना बोलने वाला अर्श पुकारेगा ,ऐ अल्लाह इज़राइल और मिसाइल को मौ-त से बचा लीजिए तब अल्लाह कहेगा कि खामोश हो जाओ मेरे अर्श के नीचे भी मौ-त है ।अल्लाह पूछेगा कि अब बताओ कौन बाकी है?तब जवाब आएगा कि अर्श के दो फरिश्ते और बाकी फरिश्ते बाकी है उस वक्त अल्लाह का हुक्म होगा कि सारे फरिश्ते म-र जाए.

अब बताओ अब कौन बाकी ?जवाब आएगा कि इसराफील बाकी हैं ,(जो फरिश्ता सुर फूंकेगा), अल्लाह कहेगा कि इसराफिल भी म-र जाए और उसी वक्त वह जमीन पर गिर कर म-र जाएगा ।अल्लाह फिर पूछेगा कि अब बताओ अब कौन बाकी ?तब जवाब आएगा कि ए अल्लाह अब तो सिर्फ तेरा गुलाम यानी कि मैं ही बाकी हूं ।तब अल्लाह कहेगा कि जा तू भी म-र जा, क्योंकि तू भी मेरी ही बनाई हूई एक मखलूक है और मैंने कहा है कि हर मखलूक को मौ-त का मजा चखना है.

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