एक मुसलमान किसी दुसरे भाई को ह’थि’या’र दिखाकर कुछ करता है तो फ़रिश्ते उस इंसान पर…

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों बहनों आज हम आपको इस्लाम से जुड़ी कुछ ऐसी चीज़ों के बारे मे बताने जा रहे हैं जिनके बारे मे शायद ही आप लोग जानते होंगे। दोस्तों अक्सर ही हम किसी से बात करते वक्त या फिर मजाक में लोगों की तरफ चा-कू से या किसी लो-हे की छ-ड़ से या किसी ह’थि’या’र से इ’शारा कर देते हैं भले ही ऐसा करने से सामने वाले को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है लेकिन ऐसा करने की वजह से फरिश्ते हम पर लानत भेजते हैं.

आइए आपको बताते हैं कि नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम ने इस बारे में क्या फरमाया है। हज़रत अबु हुरैरा र.अ. से रिवायत है कि अबु कासिम इरशाद फरमाते है कि अगर कोई शख्स अपने भाई या दोस्त या किसी दूसरे इंसान पर किसी ह’थि’या’र से इशारा करता हो, भले ही वह ऐसा मजाक में क्यों ना करता हो तो उस शख्स पर फरिश्ते तब तक लानत भेजते हैं जब तक कि वह ह’थि’या’र सामने वाले की तरफ से हट ना जाए.

google

दोस्तो कई बार हम मज़ाक में अपने भाई या बहेन को चा-कू या कोई ह’थि’या’र दिखा कर ड’रा’ने की कोशिश करते हैं जबकि हमारा इरादा सिर्फ मज़ाक का ही होता है उसे नुकसान पहुंचाने का नहीं, इसके बावजूद फ़रिश्ते हम पर लानत भेजते हैं. ऐसे ही कई बार हम मज़ाक में अपने दोस्तों से झूठ बोल देते हैं कभी कभी मज़ाक में किसी के समान को छुपा कर उनसे झूठ बोल देते हैं जबकि हम ये नहीं जानते हैं कि झूठ झूठ ही होता है भले ही मज़ाक में क्यों नहीं बोला गया हो.
google

उस झूठ की भी सज़ा उतनी ही होती है जितनी कि सच में किसी से झूठ बोलने पर मिलती है. नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि झूठ बोलने वाले पर सख्त अजाब होता है भले ही वह झूठ मजाक में ही क्यों ना बोला जाए। इसी तरह हमारे प्यारे नबी ने फरमाया है कि जो अपने लिए पसन्द करो वही दुसरो के लिए भी पसन्द करो.
google

हम अक्सर अपने लिए जब कोई भी चीज़ पसन्द करते हैं या खरीदते हैं तो हम कोशिश करते हैं कि वह चीज़ बेहतर से बेहतर हो लेकिन जब हम उसी चीज़ को किसी और के लिए लेते हैं या जब हम किसी को कुछ हदिया करते हैं तो हम उस चीज़ को थोड़ा कम ज़्यादा कर के ले लेते हैं या यूं कह सकते हैं कि जब कोई दूसरा हमारे साथ बुरा व्यवहार करता है तो उस वक़्त हमे बहुत गुस्सा आता है लेकि जब यही चीज़े दुसरो के साथ होती हैं तो हमे कोई दिक्कत नहीं होती है ऐसा करना गलत हैं। हमारे नबी ने कहा है कि आप जो कुछ भी अपने लिए पसन्द करते हो वही दुसरो के लिए भी पसन्द करे, अगर कोई बात आपको पसंद नहीं है तो वो किसी और को कैसे पसन्द हो सकती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *