हर किस्म की रुहानी तकलीफ का बेहतरीन इलाज, इस दुआ को पढ़कर…

अस्सलाम वालेकुम मेरे प्यारे भाइयों और बहनों उम्मीद है कि आप सब खैरियत से होंगे। हमारी दुआ है कि अल्लाह आप सब को खैरो आफ़ियत से रखें। प्यारे दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि अस्तग़फ़ार की फजीलत क्या है? अस्तगफार पढ़ने से क्या फायदे हासिल होते हैं और यह सब हम आप को कुरान और सुन्नत की रोशनी में बताएंगे ।हमारी बातें कोई किस्सा या कहानी नहीं है जिनको हम अपने पास से गढ़ के बताते हैं ।हम जो बातें आपको बताते हैं वह अल्लाह की कुरान और रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के फरमान से होती हैं.

हमें उम्मीद है कि आज तक हमने जो बताया वह बातें आपको अच्छी लगी होंगी। प्यारे दोस्तों आइए आपको बताते हैं हम कि अस्तग़फ़ार का अल्लाह ने कुरान में कहां-कहां जिक्र किया है। इर्शादेबारी ताला है तर्जुमा यह है कि अल्लाह गुनाह को बख्शने वाला और माफ करने वाला है तौबा का क़ुबूल करने वाला है सख्त अज़ाब वाला ,इनामो क़ुदरत वाला है उसके सिवा कोई माबूद नहीं उसी की तरफ वापस लौटना है। एक जगह फरमाया की बस ए नबी तू सब्र कर अल्लाह का वादा बिला शक व शुबहा सच्चा है ।तू अपने गुनाह की माफी मांगता रह और अपने परवरदिगार की हम्द बयान करता रह.

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अल्लाह ने एक और जगह फरमाया है कि अपने परवरदिगार से बक्शीश मांगते रहो बेशक अल्लाह बख्शने वाला और मेहरबानी करने वाला है। एक और जगह फ़रमाया है कि तू अपने रब की तस्बीह हम्द के साथ कर ।उससे मगफिरत मांग बेशक वो बड़ा ही तोबा कुबूल करने वाला है। एक और जगह फरमाया है कि ए मेरे रब मुझे माफ फरमा और मुझ पर रुजू फरमा बेशक तु माफ करवाने वाला और बख्शने वाला है.

एक और जगह इर्शादेबारी ताला है जिस का तर्जुमा है और वह लोग जब अपनी जानों पर ज़ुल्म कर बैठते हैं तब अल्लाह को याद करते हैं और एक जगह इरशादेबारी ताला है जिस का तर्जुमा है और अल्लाह ताला अपनी मौजूदगी में उन को अज़ाब देने वाला नहीं है और इसी तरह अल्लाह उनको अज़ाब नहीं देगा जबकि वो बक्शीश मांगने वाले हैं ।मजीद फरमाया जिस का तर्जुमा है जो शख्स बुराई का इंतकाब करें या अपने नफ़्स पर जुल्म करे अल्लाह से बक्शीश तालब करें तो वह अल्लाह बहुत बख़्सने वाला निहायती मेहरबान है.

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एक और जगह फरमाया है कि फिर तुम भी वहां से वापस आ जाओ जहां से लोग वापस आते हैं और अल्लाह से बक्शीश मांगो बेशक अल्लाह ताला बख्शने वाला और निहायत रहम करने वाला है। प्यारे भाइयों यह सब सिर्फ कुराने पाक की आयतों का तर्जुमा है। आइए अब हम आपको रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम के फरमान भी बता दें.

प्यारे दोस्तों बुखारी शरीफ की रिवायत है कि हजरत आयशा फरमाती है कि सूरह नसर में नुज़ूल के बाद नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम अपनी हर नमाज में “सुबहानकल्ला हुम्मा वबीहमदिका अल्लाह हुम्माग़फ़िरली ” पढ़ा करते थे और कुरान पर अमल करते हुए अपने रुकू और सजदों में कसरत से यही दुआ पढ़ा करते थे जो ऊपर लिखी गई है। नबी ए करीम सल्लल्लाहू अलैही वसल्लम एक-एक मजलिस में सौ सौ मर्तबा अल्लाह से अस्तग़फ़ार करते थे.

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