हरियाली तीज आज, जानिए कैसे प्रसन्न होंगे भगवान भोले

hariyali teej celebrated on wednesday august 11

हरियाली तीज आज मनाई जाएगी। इस दिन पति की लंबी आयु के लिए सुहागिनें व्रत रखेंगी। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को श्रावणी तीज या हरियाली तीज कहते हैं। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर माता पार्वती और भगवान शिव जी की पूजा करती हैं। दूसरे दिन सुबह स्नान और पूजा के बाद व्रत पूरा करके पारण करती हैं।
वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्योदय 5:30 पर और तृतीया तिथि का मान सायंकाल 5:01 तक है। इसी तरह पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का मान दिन में 10:42, पश्चात उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र है। शिव योग भी रात 8:26 तक है। प्रातः फाल्गुनी नक्षत्र और बुधवार का संयोग होने से इस दिन सुस्थिर नामक महा औदायिक योग बन रहा है। यह दांपत्य जीवन को स्थायी मधुरता प्रदान करेगा। भगवान शिव और पार्वती के पूजन के दिन ‘शिव’ योग होने से इस व्रत का बड़ा ही महत्वपूर्ण मान्यता के रूप मे देखा जा रहा है।

ये है मान्यता

पंडित अवधेश मिश्रा के अनुसार, हरियाली तीज के दिन सोलह श्रृंगार करें और हाथों में हरे रंग की चूड़ियां पहनें। इस दिन मेहंदी लगाने का बड़ा ही महत्व है। मान्यता है कि नवविवाहिता लड़की अपने पिता के घर में जाए और वहीं इस व्रत को करें। इस अवसर पर महिलाएं झूला झूलती हैं और सावन के गीत गाती हैं। कहा जाता है कि मां पार्वती इसी दिन घनघोर तपस्या कर भगवान शंकर को प्राप्त किया था। यह शंकर और पार्वती के मिलन का दिन है। महिलाएं अपने दांपत्य जीवन में अभिवृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को रखती हैं।

ऐसे करें पूजा-अर्चना

हरियाली तीज की तैयारी

पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, हरियाली तीज के दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मिट्टी में गंगाजल मिलाकर चौकी या पटरी पर शिवलिंग, भगवान गणेश, माता पार्वती और उनकी सखियों की प्रतिमा बनाएं। श्रृंगार की सामग्री माता पार्वती को अर्पित करें। फिर माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा करें। भगवान शिव को वस्त्र अर्पित करें और हरियाली तीज की कथा सुनें। अगले दिन व्रत का पारण करें। इस दिन भगवान शिव के प्रसन्नता के निमित्त, शिव मंत्रों का जप और शिव पुराण का वाचन अत्यंत श्रेयस्कर माना जाता है।

मेंहदी से प्रसन्न हुए थे भोलेनाथ

हरियाली तीज

पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार, तीज में मेंहदी लगाने से संबंधित कथा का पुराणों में वर्णन मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि हरियाली तीज के दिन ही मां पार्वती ने भगवान शिव को मनाने के लिए अपने हाथों में मेंहदी रचाई थी। मां पार्वती की हथेली में रची मेंहदी को देखकर भगवान शिव बेहद प्रसन्न हुए और उन्हें स्वीकार कर लिया।

हरियाली तीज पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर सजाई गई झाँकी

मेहंदी के हैं औषधीय गुण

ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, मेहंदी केवल हाथों को सजाने के लिए नहीं होती है। बल्कि इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। कहा जाता है कि मेहंदी को सिर, पंजो, हथेली और तलवों में लगाने से शीतलता महसूस होती है। इससे महिलाएं शांत रहती हैं। उनका चिड़चिड़ापन दूर होता है और परिवार में प्रेम-सौहार्द बढ़ता है। आध्यात्मिक मान्यता है कि मेहंदी लगाने से बुध और शुक्र ग्रह भी बलवान होता है।

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