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जमशेदपुर में 1 लाख 20 हजार रुपये में सड़क किनारे बिके 12 आम और बदल गई एक गरीब लड़की की किस्मत

जमशेदपुर। जमशेदपुर के स्ट्रैट माइल रोड के आउट हाउस में अपने माता-पिता के साथ रहने वाली और 5वीं कक्षा की छात्रा तुलसी विगत दिनों कीनन स्टेडियम के पास तालाबंदी के दौरान आम बेच रही थी। जानिए फिर क्या हुआ कि उसकी किस्मत पलट गइ। जमशेदपुर में एक व्यक्ति ने सड़क किनारे बिक रहे 12 आम के लिए एक लाख 20 हजार (1.20 लाख) रुपये कीमत चुकायी है। 10 हजार रुपये में एक आम बिकने की ये खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है। ये आम एक गरीब लड़की बेचे हैं, जिसकी इसके बाद किस्मत बदल गई है।

सड़क किनारे 1.20 लाख रुपये में आम बेचने वाली लड़की जमशेदपुर निवासी 12 वर्षीय तुलसी कुमारी है। उसके 12 आम के लिए 1.20 लाख रुपये चुकाए हैं मुंबई की कंपनी वैल्युएबल एडुटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने। कंपनी ने तुलसी कुमारी से मात्र एक दर्जन आम 1.20 लाख रुपये में खरीदे हैं। ताकि सड़क किनारे आम बेचने वाली वो गरीब लड़की फिर अपनी पढ़ाई शुरू कर सके। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई करने के लिए तुलसी को एक स्मार्ट मोबाइल फोन की आवश्यकता थी।

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जमशेदपुर के स्ट्रैट माइल रोड के आउट हाउस में अपने माता-पिता के साथ रहने वाली और 5वीं कक्षा की छात्रा तुलसी विगत दिनों कीनन स्टेडियम के पास लॉकडाउन के दौरान आम बेच रही थी। तुलसी ने बताया कि वह 5000 रुपये कमाना चाहती थी, ताकि वह एक मोबाइल फोन खरीद सके और अपनी ऑनलाइन पढ़ाई फिर से शुरू कर सके। स्मार्ट फोन के अभाव में वह अपनी ऑनलाइन पढ़ाई शुरू नहीं कर पा रही थी। कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गयी। तुलसी के प्रति लाखों लोग सहानुभूति व्यक्त करने लगे।

सोशल मीडिया से मिली जानकारी

मुंबई स्थित वैल्यूएबल एडुटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अमेया हेटे को सोशल मीडिया के जरिये इसकी जानकारी मिली तो वो सिर्फ सहानुभूति व्यक्त करने तक नहीं रुके। उन्होंने 10,000 रुपये प्रति आम के हिसाब से लड़की से 12 आम 1,20,000 रुपये में खरीद लिये। उन्होंने पूरी राशि तुलसी के पिता के बैंक खाते में स्थानांतरित कर दी।

तुलसी के संघर्ष से प्रभावित हुए अमेया

साथ ही उन्होंने तुलसी को पत्र लिखा “आपकी दृढ़ता और संघर्ष की कहानी को मीडिया द्वारा आगे लाया गया था और वर्षा जहांगीरदार द्वारा मेरे संज्ञान में लाया गया था। आप जैसे कई छात्र हैं जो आवश्यक बुनियादी ढांचे की कमी के कारण ऑनलाइन सीखने के नये युग का सामना करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मैं वास्तव में इस तथ्य से प्रभावित हूं कि आपने हार नहीं मानी और इससे निपटने के लिए संघर्ष किया। आपने साबित कर दिया है कि ‘जहां चाह है, वहां राह है’। आपने ‘इच्छा’ दिखाई है, हम ‘रास्ता’ खोजने में आपकी मदद कर रहे हैं।”

मोबाइल न होने से रुक गई थी पढ़ाई

तुलसी कहती है, ‘हां, मैंने आम बेचे और एक फोन खरीदने के लिए पैसे जुटाने में लगी हुई थी, ताकि मैं अपनी पढ़ाई ऑनलाइन फिर से शुरू कर सकूं। अब मैंने एक फोन खरीद लिया है और मैं ऑनलाइन क्लास कर पाऊंगी। तुलसी ने फोन पर बताया कि 5वीं कक्षा में एक सरकारी स्कूल में जाना बंद कर दिया था। महामारी के कारण लगे लॉकडाउन की वजह से स्कूल में ऑनलाइन पढाई शुरू हो गई और मोबाइल न होने की वजह से उसकी पढ़ाई रुक गई थी।’

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टीचर बन गरीब बच्चों को पढ़ाना चाहती है तुलसी

तुलसी बताती हैं कि लॉकडाउन के कारण उसके पिता की नौकरी छूटने के बाद परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। तुलसी पढ़ना चाहती थी, लेकिन मोबाइल फोन न खरीद पाने की वजह से पढ़ाई नहीं कर पा रही थी। तुलसी ने बताया कि अब वह स्वयं पढाई करेगी और साथ में दो बहनें रोशनी तथा दीपिका को भी पढ़ाएगी। उसका सपना है कि तीनों बहन टीचर बनकर गरीब बच्चों के बीच शिक्षा का प्रसार करेंगी, जिससे कोई भी गरीब शिक्षा से वंचित न रह सके।

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