Navratri 2021: सांप के जहर को भी बेअसर कर देती है देवी मां, दर्शन करने आते हैं 25 लाख भक्त

दतिया. इंसानों के अलावा पशुओं का भी होता है मंदिर में इलाज, चार सौ साल पहले अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद अस्तित्व में आई थी देवी। देश में देवी मां के कई ऐसे चमत्कारिक मंदिर हैं जिसकी महिमा को जान हर कोई हैरान रह जाता है। मां का ऐसा ही एक अद्भुत धाम मध्य प्रदेश से दतिया जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर रामपुरा गांव के पास स्थित है। इसका नाम रतनगढ़वाली माता का मंदिर है।

मान्यता है ये मंदिर इतना सिद्ध है कि यहां कि मिट्टी में भी चमत्कारिक गुण हैं। अगर किसी को जहरीले जीव ने डंस लिया हो तो यहां की मिट्टी चटाने से रोगी तुरंत स्वस्थ हो जाता है। इसी मान्यता के चलते यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन करने को आते हैं। शारदीय नवरात्र 2021 के मौके पर आप को बता रहा है मध्यप्रदेश के प्रमुख देवी मंदिरों के बारे में…।

काटे जाते हैं सांप काटने के बंध


लख्खी मेला के दौरान उन लोगों के बंध काटे जाएंगे कि जिन्हें कभी सांप ने काटा था। मान्यता है कि यदि किसी को सांप काट ले तो तुरंत ही रतनगढ़ माता के नाम पर बंध बांध दिया जाते हैं। फिर जब भी माता का मेला भरता है तब बंध काट कर संबंधित व्यक्ति को सिंध नदी में नहलाया जाता है। फिर माता के दर्शन के लिए ले जाया जाता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि जहरीले जीव का जहर भी माता के चमत्कार के सामने बेअसर साबित होता है। मंदिर प्रांगढ़ की मिट्टी को लोग भभूत के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

मंदिर से जुड़ी एक कथा भी प्रचलित है। बताया जाता है कि करीब चार सौ साल पहले जिले में तानाशाह अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया था। उसने सेंवढ़ा से रतनगढ़ आने वाले पानी को बंद कर दिया था। तब राजा रतन सिंह की बेटी मांडुला और उनके भाई कुंवर गंगाराम देव ने इसका विरोध किया था। उन्होंने भीषण जंगल में जल समाधि ले ली थी। तभी से माता रतनगढ़ और भाई कुंवर देव इस मंदिर में पूजे जाते हैं।


यह मंदिर पवित्र स्थान सिंध नदी के किनारे स्थित है। मंदिर में देवी मां के दर्शन के अलावा कुंवर महाराज की भी पूजा की जाती है। इंसानों के अलावा जो पशु बीमार होते हैं उनका भी इलाज इस मंदिर में होता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर भाई दूज के दिन पशु को बांधने वाली रस्सी देवी मां के पास रखी जाए। इसके बाद उस रस्सी से दोबारा पशु को बांधा जाए तो वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। मंदिर पर हर साल मेला लगता है जिसमें 25 लाख से ज्यादा भक्त मंदिर पहुंचते हैं।

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